बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम और केले के पेड़ की पूजा

बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम और केले के पेड़ की पूजा

विवाह में देरी से बचने और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए

बृहस्पति मंदिर काशी
गुरुवार, 22 अक्तूबर पापांकुशा एकादशी

This puja includes up to 4 family members at no extra cost.

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पूजा का महत्व

इस अनुष्ठान का उद्देश्य शीघ्र विवाह, सुखी दांपत्य जीवन, योग्य जीवनसाथीसभी पापों और कर्म दोषों से पूर्ण मुक्तिकुंडली में गुरु ग्रह की कमजोरी व गुरु दोष से बचने के लिएबौद्धिक क्षमता और सही निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि के लिएपापांकुशा एकादशी पर यह अन…

पूजा के लाभ

शीघ्र विवाह एवं योग्य जीवनसाथी:

विवाह में देरी, रिश्ते तय न हो पाना या अकारण अड़चनें दूर हो सकती है। चरित्रवान, योग्य और स्नेह रखने वाला जीवनसाथी मिलता है।

कुंडली के गुरु दोष से मुक्ति:

गुरु की नीच स्थिति का प्रभाव शांत होता है। बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। सही फैसले लेने की शक्ति आती है।

रिश्तों में सामंजस्य:

कमजोर बृहस्पति को रिश्तों में गलतफहमी से जोड़ा जाता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ और केले के पेड़ की पूजा मन को शांत करने तथा आपसी समझ, प्रेम और संतुलन बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

पापों से मुक्ति:

विष्णु सहस्रनाम के पाठ से पिछले कर्मों के दोषों से मुक्ति मिलती है। पापमुक्त होते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

पूजा प्रक्रिया

01

नाम-गोत्र संकल्प:

आचार्यों द्वारा आपके नाम-गोत्र से शीघ्र विवाह और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का विशेष वेदोक्त संकल्प।

02

देवगुरु बृहस्पति आवाहन एवं पूजन:

देवगुरु बृहस्पति का वैदिक मंत्रों से आवाहन एवं विधिवत पूजन।

03

विष्णु सहस्रनाम पाठ:

भगवान श्री हरि विष्णु के 1000 दिव्य नामों (विष्णु सहस्रनाम) का विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक पाठ।

04

केले के वृक्ष का पूजन:

विधि-विधान से पवित्र केले के वृक्ष का विशेष पूजन।

05

बृहस्पति ग्रह शांति यज्ञ:

वैदिक पद्धतियों के अनुसार यज्ञ सामग्री और गुरु मंत्रों की आहुतियों द्वारा शांति यज्ञ।

06
✦ The Core Ritual

पूर्णाहुति व महाआरती:

यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद देवगुरु और भगवान विष्णु से शीघ्र विवाह का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु आरती व क्षमा प्रार्थना।

मंदिर विवरण

बृहस्पति मंदिर

काशी

भगवान शिव की नगरी काशी में दशाश्वमेध घाट के समीप स्थित बृहस्पति मंदिर बहुत ही प्राचीन और प्रतिष्ठित है। शास्त्रों के अनुसार, इसी पावन स्थल पर देवगुरु बृहस्पति ने तपस्या कर भगवान शिव से नवग्रह में गुरु पद प्राप्त किया था। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं देवगुरु बृहस्पति ने की थी। एकादशी के पावन दिन इस ऐतिहासिक धाम में की गई पूजा निष्फल नहीं जाती और साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

आपको क्या मिलेगा?

01

पूजन का व्यक्तिगत संकल्पित वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब

यह पूजा किसे कराना चाहिए?
क्या यह पूजा लड़के और लड़की दोनों के शीघ्र विवाह के लिए कराई जा सकती है?
काशी के बृहस्पति मंदिर में पूजा कराने का क्या विशेष महत्व है?
क्या मैं स्वयं उपस्थित हुए बिना इस पूजा का लाभ पा सकता हूं?
वेदा मंदिर द्वारा पूर्ण वैदिक विधान से होने वाली पूजाओं में शामिल हों, सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति प्राप्त करें।
बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम और केले के पेड़ की पूजा