शतभिषा नक्षत्र दुर्लभ योग: कालसर्प दोष एवं राहु-केतु शांति महाअनुष्ठान
राहु के स्वयं के नक्षत्र 'शतभिषा' के महामुहूर्त में सिद्ध राहु पैठाणी मंदिर में विशेष कालसर्प शांति, राहु-केतु शांति पूज
This puja includes up to 4 family members at no extra cost.
पूजा का महत्व
पूजा के लाभ
12 प्रकार के कालसर्प दोषों से मुक्ति
अनन्त, वासुकि, तक्षक आदि सभी कालसर्प योगों का घातक प्रभाव समाप्त होता है।
करियर व व्यापार में अचानक उछाल
: मान्यता है कि कालसर्प दोष शांत होने पर नौकरी में प्रमोशन के मार्ग खुलते हैं, अटका हुआ धन वापस मिलता है और व्यापार में प्रगति होती है।
मानसिक भ्रम व भय का अंत
राहु जनित अनिद्रा, डिप्रेशन, एंग्जायटी और राहु के कारण आने वाले डरावने सपनों से मुक्ति मिलती है।
विवाह एवं संतान योग
राहु-केतु के कारण विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति एवं शिव-नाग पूजन
विघ्नहर्ता श्री गणेश, भगवान शिव (नागभूषण) और नवनागों का आवाहन।
नाम-गोत्र संकल्प
कालसर्प दोष शांति की विशेष कामना के साथ आचार्यों द्वारा संकल्प।
राहु-केतु महा-मंत्र जाप
राहु के सिद्ध पैठाणी विग्रह के समक्ष वैदिक आचार्यों द्वारा राहु-केतु वैदिक मंत्रों का जाप।
शतभिषा विशेष कालसर्प हवन
विशेष जड़ी-बूटियों एवं नाग-नागिन के जोड़ों के साथ अग्नि में आहुतियां।
पूर्णाहुति व महाआरती
आरती के साथ राहु देव और भगवान शिव से आपके कल्याण व दोष-मुक्ति की प्रार्थना।
मंदिर विवरण
राहु पैठाणी मंदिर
उत्तराखंड की देवभूमि के पौड़ी गढ़वाल जिले में पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों के पावन संगम के पास स्थित राहु मंदिर (पैठाणी) अत्यंत रहस्यमयी और प्राचीन सिद्ध पीठ है। यह विश्व के गिने-चुने मंदिरों में से एक है, जहां राहु देव की पूजा भगवान शिव के साथ की जाती है। राष्ट्रकूट शैली में बने इस ऐतिहासिक स्थल पर राहु देव का मस्तक एक चट्टान के रूप में स्थापित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां राहु देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके अपने अपराधों की क्षमा…
आपको क्या मिलेगा?
पूजन, हवन और आरती का पूरा वीडियो 48 घंटे के भीतर आपको WhatsApp पर भेजा जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
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