काली चौदस सिद्धि मुहूर्त: सर्व-बाधा विनाशक आद्या काली महाअनुष्ठान
शत्रु संहारक मां महाकाली के आशीर्वाद से भयंकर तंत्र-बाधा, नजर दोष, नकारात्मक ऊर्जा गुप्त शत्रुओं से संपूर्ण मुक्ति
पूजा का महत्व
पूजा के लाभ
असाध्य रोगों से मुक्ति
पुरानी बीमारियां, अकारण शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव दूर होता है; शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
संतान सुख की प्राप्ति
संतान हीन दंपतियों को माता रानी के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं और गर्भरक्षा होती है।
तंत्र-बाधा व नजर दोष का नाश
घर-परिवार पर किया गया कोई भी काला जादू, तंत्र प्रहार, नजर दोष या नकारात्मक शक्ति तुरंत निष्प्रभावी हो जाती है।
अभेद्य सुरक्षा चक्र
परिवार का हर सदस्य दुर्घटनाओं, अकाल मृत्यु के भय और शत्रुओं की चालों से सुरक्षित रहता है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति व महाकाली आवाह्न
विघ्नहर्ता श्री गणेश और साक्षात मां काली का ध्यान, आवाह्न व षोडशोपचार पूजन।
विशेष नाम-गोत्र संकल्प
आपके, आपके परिवार, बीमारी से मुक्ति, संतान प्राप्ति या तंत्र बाधा शांति की विशेष कामना के साथ प्रामाणिक संकल्प।
महाविद्या व काली मूल-मंत्र जाप
वैदिक आचार्यों द्वारा मां काली के सिद्ध मूल मंत्रों और अर्गला स्तोत्र का पाठ।
काली चौदस विशेष काली हवन
कपूर, गुग्गुल, लौंग, बताशे, पीली सरसों, समिधा और विशेष औषधियों के साथ हवन कुंड में दोष शमन आहुतियां।
कालीघाट महाआरती व प्रसादम अर्पण
धूप-दीप से मां की अलौकिक आरती, गुड़-चने व मिष्ठान का भोग अर्पण कर सर्व-रक्षा की प्रार्थना।
मंदिर विवरण
कालीघाट,शक्तिपीठ
देवी भागवत पुराण और तंत्रचूड़ामणि के अनुसार, कालीघाट वह पावन शक्तिपीठ है जहाँ माता सती के दाएँ पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। इसे तांत्रिक ग्रंथों में 'कालीपीठ' कहा गया है। यहाँ अधिष्ठात्री देवी माँ 'दक्षिणा कालिका' के साथ उनके क्षेत्रपाल 'नकुलेश्वर महादेव' विराजमान हैं। तंत्र-शास्त्र के अनुसार, जहाँ शक्ति और भैरव एक साथ पूजित हों, वहाँ किया गया महा-अनुष्ठान शीघ्र फलदायी होता है। कालीघाट में माँ काली का स्वरूप अत्यंत जाग्रत है। उनकी तीन आँखें त्रिकाल-…
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
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