एकादशी विशेष

कुंडली के सबसे घातक और छिपे दोषों की विशेष शांति महापूजा

  • उत्तम स्वास्थ्य
  • गुरु दोष
  • मंगल दोष
बृहस्पति मंदिर, काशी
गुरुवार, 5 नवंबर
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पूजा का महत्व

गुरु-चांडाल दोष निवारण पूजा का उद्देश्य

  • कुंडली के सबसे छद्म और विषैले दोष का शमन

  • बुद्धि के पतन, काल्पनिक दुनिया में जीने और टालमटोल का अंत 

  • अदृश्य बीमारियों से स्वास्थ्य रक्षा 

  • असमंजस, बुद्धि भ्रम, गलत फैसलों और डिप्रेशन से मुक्ति


क्या है यह ‘धीमे जहर’ जैसा छिपा हुआ दोष?

सनातन ज्योतिष में जब ज्ञान, धर्म और विवेक के दाता देवगुरु बृहस्पति के साथ छल, भ्रम और अनैतिकता के छायाग्रह राहु (या केतु) की युति बनती है, तब इस दोष का निर्माण होता है, जो इंसान की बुद्धि ऐसे हर लेता है कि वह स्वास्थ्य, करियर, परिवार, से लेकर जिंदगी के हर मोड़ पर अपना ही नुकसान करता चला जाता है। 

यह शनि या मंगल की तरह अचानक झटका नहीं देता, बल्कि दीमक की तरह धीरे-धीरे इंसान के विवेक को चाटता है। यही कारण है कि व्यक्ति को सालों तक अपनी बर्बादी का अंदाजा ही नहीं होता। 

वैदिक ज्योतिष में यह दोष 'गुरु-चांडाल दोष' नाम से जाना जाता है। जब राहु का चांडाल प्रभाव गुरु पर हावी होता है, तो इंसान को गलत रास्ते भी सही लगने लगते हैं और वह स्वयं अपने ही हाथों अपनी बर्बादी की पटकथा लिख देता है।

क्या है गुरु-चांडाल दोष की पहचान (लक्षण)?

मानसिक व व्यवहारिक बदलाव: निर्णय लेने में भयंकर भ्रम, "मुझे सब पता है" का अकारण अहंकार, काम करने के बजाय केवल रातों-रात अमीर बनने के ख्याली पुलाव पकाना और लगातार काम टालना।

जीवनशैली व खान-पान का पतन: देर रात तक मोबाइल स्क्रॉलिंग की लत, सुबह देर से उठना, घर का सात्विक खाना छोड़कर बाहर के बासी/तामसिक भोजन का मोह और बिस्तर पर खाने की आदत।

सच्चे शुभचिंतकों से दूरी: माता-पिता, गुरुओं और सच्चे दोस्तों की सलाह को अपमान समझना तथा चापलूस व स्वार्थी लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करना।

आर्थिक चक्रव्यूह: मेहनत की कमाई छोड़कर सट्टेबाजी, बाजार या डबल करने वाली लालची स्कीमों में सेविंग्स गंवाना और समाज में दिखावे के लिए EMI/कर्ज के जाल में फंसना।

गुप्त स्वास्थ्य समस्याएं: लिवर की बीमारियां, अचानक वजन बढ़ना, शुगर और पाचन तंत्र की ऐसी बीमारियां जो शुरुआत में पकड़ नहीं आतीं।


एकादशी तिथि और ब्रहस्पति मंदिर में इस पूजा का महत्व

5 नवंबर को बृस्पतिवार के साथ-साथ एकादशी तिथि है, जो देवगुरु बृहस्पति के आराध्य देव साक्षात भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। मान्यता है  जब एकादशी के दिन बृहस्पति मंदिर में पूजा की जाती है, तो गुरु ग्रह अपने स्वामी भगवान विष्णु के प्रभाव से अत्यंत सात्विक और बलवान हो जाते हैं, जिससे राहु का नकारात्मक प्रभाव (चांडाल प्रभाव) अपने आप शांत होने लगता है। कहते हैं कि राहु और गुरु के इस चांडाल प्रभाव को काटने के लिए काशी का गुरु बृहस्पति मंदिर विश्व का सबसे शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है। यह वही सिद्ध स्थल है जहां स्वयं देवगुरु ने 'बृहस्पतीश्वर' शिवलिंग की स्थापना कर तपस्या की थी। इस दिन यहां की गई पूजा सीधे राहु के भ्रमजाल को काटकर देवगुरु बृहस्पति के शुभ विवेक को पुनर्जागृत कर देती है।

पूजा के लाभ

1

विवेक व निर्णय शक्ति की पुनर्प्राप्ति

राहु का चांडाल भ्रम छंटता है, जिससे सही और गलत की पहचान होती है और गलत शॉर्टकट लेने की मानसिकता खत्म होती है।

2

जीवनशैली व आदतों में सुधार

देर रात जागने की लत, डिप्रेशन, अनैतिक आकर्षण और जंक/तामसिक भोजन के प्रति झुकाव दूर होता है।

3

आर्थिक सुरक्षा व कर्ज से बचाव

जोखिम भरे निवेशों और सट्टेबाजी में डूबा पैसा रुकता है, तथा दिखावे के कर्ज (EMI Trap) से मुक्ति मिलती है।

4

पारिवारिक सामंजस्य व सम्मान

माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद पुनः प्राप्त होता है, तथा समाज में खोया हुआ मान-सम्मान वापस लौटता है।

5

अदृश्य बीमारियों से बचाव

फैटी लिवर, मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और साइलेंट हेल्थ किलर बीमारियों से शारीरिक रक्षा होती है।

पूजा प्रक्रिया

1

गणपति व नवग्रह शांति आवाहन

विघ्नहर्ता श्री गणेश और सभी नवग्रहों का ध्यान व स्थापना।

2

विशेष नाम-गोत्र व मतिभ्रम मुक्ति संकल्प

आपके और आपके परिवार के नाम-गोत्र से गुरु-चांडाल दोष के शमन और विवेक-बुद्धि की पुनर्प्राप्ति का वैदिक संकल्प।

3

देवगुरु व राहु मंत्र सम्पुट जाप

काशी के सिद्ध बृहस्पतीश्वर विग्रह के समक्ष गुरु (ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः) और राहु मंत्रों का वैदिक पाठ।

4

चांडाल शमन हवन

पीली सरसों, समिधा, काले तिल, दूर्वा, औषधियों और पीत-पुष्पों के साथ अग्नि में दोष शमन आहुतियां।

5
✦ The Core Ritual

बृहस्पति महाआरती व पीत-पुष्प अर्पण

महाआरती के साथ देवगुरु को चने की दाल, पीले मिष्ठान व वस्त्र अर्पण कर सुमति का आशीर्वाद।

आपको क्या मिलेगा?

पूजा का वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।

मंदिर विवरण

बृहस्पति मंदिर

बृहस्पति मंदिर

काशी
भगवान शिव की नगरी काशी में दशाश्वमेध घाट के समीप स्थित बृहस्पति मंदिर बहुत ही प्राचीन और प्रतिष्ठित है। शास्त्रों के अनुसार, इसी पावन स्थल पर देवगुरु बृहस्पति ने तपस्या कर भगवान शिव से नवग्रह में गुरु पद प्राप्त किया था। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं देवगुरु बृहस्पति ने की थी। एकादशी के पावन दिन इस ऐतिहासिक धाम में की गई पूजा निष्फल नहीं जाती और साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब

Family Puja

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

ल
ललिता देवी
प्रयागराज
Verified
Private Puja

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

स
सुजाता डलास
शिकागो
Verified
Individual

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

र
रमेश कुमार
बेंगलुरु
Verified

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ल

ललिता देवी

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

5.0
स

सुजाता डलास

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

5.0
र

रमेश कुमार

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

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पूजा सम्पन्न होने के 48 घंटे के भीतर पूजा का वीडियो आपके व्हाट्सऐप पर भेज दिया जाएगा।

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