शनिवार विशेष

शनि साढ़े साती, ढैय्या व महादशा शांति महापूजा एवं शनि तिल-तैलाभिषेक

  • शनि दोष
  • नवग्रह शांति
श्री नवग्रह शनि मंदिर, उज्जैन
शनिवार, 7 नवंबर
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पूजा का महत्व

इस अनुष्ठान का उद्देश्य

  • जीवन से अकारण आने वाली रुकावटों का शमन

  • साढ़े साती, ढैय्या और शनि दोष के दुष्प्रभावों से बचने का सुरक्षा कवच 

  • शनि के आशीर्वाद से करियर, व्यापार और स्वास्थ्य में उन्नति

  • परिवार में सुख, शांति, सुरक्षा और समृद्धि का विस्तार

साढ़े साती, ढैय्या और शनि दोष के लक्षण

शनि देव नाराज हों तो जीवन में कई समस्याएं घेर लेती हैं-

  • बनते हुए कार्यों का अंतिम समय पर अटक जाना और निरंतर असफलता

  • अकारण भय, उदासी, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव

  • व्यापार में  नुकसान और भारी आर्थिक कर्ज

  • पारिवारिक सदस्यों के बीच कलह और असुरक्षा की भावना

  • जीवन में अकारण बाधाएं आने लगती हैं


शनिवार शनि साढ़े साती विशेष महामुहूर्त में पूजा का महत्व

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनिवार के अधिपति और स्वामी स्वयं शनिदेव हैं। मान्यता है कि इस दिन पूरे ब्रह्मांड में शनिदेव की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसीलिए शनिवार के दिन की गई पूजा सीधे शनिदेव तक पहुंचती है और शनिदेव का उग्र व क्रूर प्रभाव तुरंत शांत हो जाता है। मान्यता है कि शनिदेव के पास सभी के कर्मों का लेखा-जोखा होता है, इसलिए इस दिन किया शनि तिल-तैलाभिषेक और शनि शांति पूजन न केवल शनि की दशा से राहत दिलाता है, बल्कि कुंडली में शनि की स्थिति से बने गंभीर दोषों से भी राहत देता है। जिससे जीवन में आने वाली अकारण बाधाओं का शमन होता है और बिगड़े काम बनने लगते हैं। 

शनि देव को क्यों चढ़ाया जाता है तिल का तेल? 

कहते हैं कि जब महर्षि दधिचि ने देवराज इंद्र के अस्त्र वज्र के निर्माण के लिए हड्डियों का दान कर शरीर त्याग दिया, तो उनकी पत्नी 3 साल के पुत्र पिप्पलाद को छोड़कर सती हो गईं। बचपन में माता-पिता के छोड़ जाने से पिप्पलाद को बहुत कष्ट हुए। बड़े होकर पिप्पलाद भी महान ऋषि बने। उन्हें पता चला कि उनके परिवार पर शनि की दृष्टि की वजह से उन्हें ये दुख देखने पड़े।

तब उन्होंने शनि देव पर अपनी शक्तियों का प्रहार किया, जिससे शनि देव का पूरा शरीर चोटिल हो गया और वह बहुत कमजोर हो गए। बाद में ब्रह्मा जी के समझाने पर मूल रूप से दयालु स्वभाव के पिप्पलाद ऋषि ने शांत होकर शनि देव की चोटों पर तिल का तेल लगाया, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिली। तब शनि देव ने वरदान दिया कि जो कोई भी उन पर तिल का तेल चढ़ाएगा, उसे शनि दोषों के कारण होने वाले कष्टों से मुक्ति मिलेगी।


उज्जैन का शनि नवग्रह मंदिर इतना खास क्यों है

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार अहंकार में आकर राजा विक्रमादित्य ने शनिदेव को क्रूर और अन्य ग्रहों से छोटा बता दिया। इससे नाराज होकर शनिदेव ने राजा पर साढ़ेसाती लगा दी। शनि के प्रभाव से राजा का राजपाट छिन गया, उन्हें दर-दर भटकना पड़ा। इस दौरान चोरी के झूठे आरोप में उनके हाथ-पैर काट दिए गए। इस कठिन समय से गुजरने पर राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपना अहंकार त्यागकर शनिदेव की सच्ची भक्ति और आराधना की। विक्रमादित्य की भक्ति से प्रसन्न होकर शनिदेव ने उन्हें क्षमा कर दिया, जिससे राजा के हाथ-पैर ठीक हो गए और उन्हें राजपाट भी वापस मिल गया। 

शनि साढ़े साती से मुक्ति पाने के बाद कृतज्ञता स्वरूप, राजा विक्रमादित्य ने त्रिवेणी संगम पर इस नवग्रह शनि मंदिर की स्थापना की और ग्रहों के अनिष्ट प्रभाव को रोकने के लिए उन्हें शिवलिंग स्वरूप में स्थापित किया। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना और शनिदेव की कृपा के बाद ही हिंदू काल-गणना के आधार 'विक्रम संवत की शुरुआत हुई थी।


पूजा के लाभ

1

शनि दोषों से राहत

ढैय्या, साढ़े साती और महादशा के उग्र प्रभावों में शांति मिलती है।

2

जीवन में आ रही बाधाओं का नाश

कोर्ट-कचहरी, करियर और व्यापार में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

3

आरोग्य और मानसिक शांति

मानसिक तनाव, अकारण भय और पुरानी बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

पूजा प्रक्रिया

1

नाम-गोत्र संकल्प

आपके नाम, गोत्र और रक्षा की कामना के साथ वेदोक्त संकल्प।

2

गणेश पूजन

पूजा को निर्विघ्न संपन्न करने के लिए गौरी-गणेश पूजन

3

शनि शांति पूजा

शनि साढ़े साती, ढैय्या व महादशा के प्रभावों को शांत करने के लिए न्याय के देवता शनि देव की विशेष पूजा-अर्चना

4
✦ The Core Ritual

विशेष तिल तेल अभिषेक

काले तिल और सरसों के तेल की निरंतर धारा से शनिदेव का महा-अभिषेक

आपको क्या मिलेगा?

शनि साढ़े साती, ढैय्या व महादशा शांति महापूजा एवं शनि तिल तैलाभिषेक का पूरा वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।

मंदिर विवरण

श्री नवग्रह शनि मंदिर

उज्जैन
मध्य प्रदेश की पवित्र धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह नवग्रह शनि मंदिर अति-प्राचीन और ऐतिहासिक सिद्ध पीठ है। यह वहीं स्थान है, जहां शनिदेव स्वयं नवग्रहों के साथ विराजमान है। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना राजा विक्रमादित्य के काल में हुई थी। मान्यता है कि इस जाग्रत तीर्थ पर कोई भी अनुष्ठान निष्फल नहीं जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब

Family Puja

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

ल
ललिता देवी
प्रयागराज
Verified
Private Puja

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

स
सुजाता डलास
शिकागो
Verified
Individual

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

र
रमेश कुमार
बेंगलुरु
Verified

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ल

ललिता देवी

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

5.0
स

सुजाता डलास

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

5.0
र

रमेश कुमार

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

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पूजा सम्पन्न होने के 48 घंटे के भीतर पूजा का वीडियो आपके व्हाट्सऐप पर भेज दिया जाएगा।

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