बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम और केले के पेड़ की पूजा

  • पारिवारिक सुख-शांति
  • सुखी दांपत्य जीवन
  • विवाह में विलंब से मुक्ति
बृहस्पति मंदिर, काशी
गुरुवार, 5 नवंबर
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पूजा का महत्व

इस अनुष्ठान का उद्देश्य 

  • शीघ्र विवाह, सुखी दांपत्य जीवन, योग्य जीवनसाथी

  • सभी पापों और कर्म दोषों से पूर्ण मुक्ति

  • कुंडली में गुरु ग्रह की कमजोरी व गुरु दोष से बचने के लिए

  • बौद्धिक क्षमता और सही निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि के लिए

एकादशी पर यह अनुष्ठान क्यों विशेष है? 

सनातन परंपरा में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित हैं। मान्यता है कि एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन न सिर्फ पिछले सभी पापों को नष्ट करता है, बल्कि लोगों को भविष्य में भी अधर्म के रास्ते से दूर करता है। कहते हैं इस दिन पूजन करने वाले जातक को यमराज के दर्शन नहीं करने पड़ते और वह नर्क की यातनाओं से मुक्त होता है। शास्त्रों में एकादशी तिथि सर्वश्रेष्ठ और शीघ्र फल देनी वाली तिथि माना गया है। 

मान्यता है कि एकादशी पर देवगुरु बृहस्पति की साधना करने से विवाह मार्ग के सभी अवरोध स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्याओं के विवाह के लिए गुरु ग्रह का बली होना अनिवार्य माना गया है। एकादशी तिथि जब बृहस्पति के दिन आती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम पाठ तथा केले के वृक्ष का विधिवत पूजन कराने से विवाह में आ रही अड़चने दूर होती हैं और शीघ्र विवाह योग बनने लगते हैं। 

बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम एवं केले के पेड़ की पूजा का महत्व

सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में विवाह से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ को सर्वोपरि माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति कन्याओं के विवाह, सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के मुख्य कारक हैं। यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, पीड़ित या नीच हो, तो विवाह की बातचीत बार-बार टूटती है या अत्यधिक देरी होती है। बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ से कुंडली का गुरु दोष कटता है और अटके हुए विवाह के मार्ग शीघ्र खुलते हैं। 

मान्यता है कि विष्णु सहस्रनाम पाठ से पिछले कर्मों के दोष और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है, जिससे जीवन में यश, सफलता और एश्वर्य मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है।

केले के पेड़ को साक्षात देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु का वास माना जाता है। मान्यता है कि गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने से कुंडली में बैठा कमजोर या पीड़ित गुरु ग्रह बलवान हो जाता है।

काशी के बृहस्पति मंदिर की महिमा 

काशी खंड और स्कंद पुराण के अनुसार, महर्षि अंगिरा के पुत्र बृहस्पति ने भगवान शिव की नगरी काशी में आकर एक अत्यंत दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने यहां हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी निश्चल भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें समस्त नवग्रहों में 'देवगुरु', ज्ञान के अधिपति तथा 'मंत्र सिद्धि' का पद प्रदान किया। काशी का यह बृहस्पति मंदिर वही ऐतिहासिक स्थल है जहां स्वयं ग्रहों के स्वामी भगवान शिव ने बृहस्पति जी को नवग्रह मंडल में स्थान दिया था। 


पूजा के लाभ

1

शीघ्र विवाह एवं योग्य जीवनसाथी

विवाह में देरी, रिश्ते तय न हो पाना या अकारण अड़चनें दूर हो सकती है। चरित्रवान, योग्य और स्नेह रखने वाला जीवनसाथी मिलता है।

2

कुंडली के गुरु दोष से मुक्ति

गुरु की नीच स्थिति का प्रभाव शांत होता है। बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। सही फैसले लेने की शक्ति आती है।

3

रिश्तों में सामंजस्य

कमजोर बृहस्पति को रिश्तों में गलतफहमी से जोड़ा जाता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ और केले के पेड़ की पूजा मन को शांत करने तथा आपसी समझ, प्रेम और संतुलन बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

4

पापों से मुक्ति

विष्णु सहस्रनाम के पाठ से पिछले कर्मों के दोषों से मुक्ति मिलती है। पापमुक्त होते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

पूजा प्रक्रिया

1

नाम-गोत्र संकल्प

आचार्यों द्वारा आपके नाम-गोत्र से शीघ्र विवाह और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का विशेष वेदोक्त संकल्प।

2

देवगुरु बृहस्पति आवाहन एवं पूजन

देवगुरु बृहस्पति का वैदिक मंत्रों से आवाहन एवं विधिवत पूजन।

3

विष्णु सहस्रनाम पाठ

भगवान श्री हरि विष्णु के 1000 दिव्य नामों (विष्णु सहस्रनाम) का विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक पाठ।

4

केले के वृक्ष का पूजन

विधि-विधान से पवित्र केले के वृक्ष का विशेष पूजन।

5

बृहस्पति ग्रह शांति यज्ञ

वैदिक पद्धतियों के अनुसार यज्ञ सामग्री और गुरु मंत्रों की आहुतियों द्वारा शांति यज्ञ।

6
✦ The Core Ritual

पूर्णाहुति व महाआरती

यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद देवगुरु और भगवान विष्णु से शीघ्र विवाह का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु आरती व क्षमा प्रार्थना।

आपको क्या मिलेगा?

पूजन का व्यक्तिगत संकल्पित वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।

मंदिर विवरण

बृहस्पति मंदिर

बृहस्पति मंदिर

काशी
भगवान शिव की नगरी काशी में दशाश्वमेध घाट के समीप स्थित बृहस्पति मंदिर बहुत ही प्राचीन और प्रतिष्ठित है। शास्त्रों के अनुसार, इसी पावन स्थल पर देवगुरु बृहस्पति ने तपस्या कर भगवान शिव से नवग्रह में गुरु पद प्राप्त किया था। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं देवगुरु बृहस्पति ने की थी। एकादशी के पावन दिन इस ऐतिहासिक धाम में की गई पूजा निष्फल नहीं जाती और साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब

Family Puja

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

ल
ललिता देवी
प्रयागराज
Verified
Private Puja

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

स
सुजाता डलास
शिकागो
Verified
Individual

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

र
रमेश कुमार
बेंगलुरु
Verified

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ल

ललिता देवी

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

5.0
स

सुजाता डलास

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

5.0
र

रमेश कुमार

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

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पूजा सम्पन्न होने के 48 घंटे के भीतर पूजा का वीडियो आपके व्हाट्सऐप पर भेज दिया जाएगा।

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