राहु नक्षत्र विशेष

राहु-केतु पीड़ा शांति पूजा एवं शिव रुद्राभिषेक

  • राहु दोष
  • रक्षा एवं विघ्न निवारण
राहु पैठाणी मंदिर, पैठाणी, उत्तराखंड
रविवार, 8 नवंबर | Auspicious Muhurat
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पूजा का महत्व

इस अनुष्ठान का उद्देश्य

  • राहु-केतु जनित भ्रमजाल का शमन

  • बुद्धि व विवेक में अद्भुत स्पष्टता और व्यापार/करियर में सटीक निर्णय क्षमता की प्राप्ति की कामना

  • जन्मकुंडली में राहु-केतु के दुष्प्रभावों से जीवन में आ रहे संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद

  • भगवान शिव की कृपा से जीवन में स्थिरता, सफलता और आंतरिक शांति का आगमन

स्वयं राहु के स्वामित्व वाले नक्षत्र में इस पूजा का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में राहु को 'भ्रम' और केतु को 'दिशाहीनता' का कारक माना गया है। जब कुंडली में राहु या केतु का अशुभ प्रभाव होता है, तो व्यक्ति का दिमाग सही तरीके से काम नहीं करता। छाया ग्रह राहु का भ्रम जाल, बुद्धि भ्रष्ट कर देता है। कहते हैं राहु साथ न दे तो डरावने सपने आते हैं, गलत फैसले नुकसान पहुंचाते हैं, भ्रम की स्थिति बनी रहती है। बनते हुए कामों में बाधाएं आ जाती हैं, डिप्रेशन हो सकता है और अचानक आर्थिक नुकसान के साथ ही कर्ज के बोझ में भी दब सकते हैं। वैदिक ज्योतिष में स्वाति, शतभिषा और आद्रा नक्षत्रों के स्वामी स्वयं छाया ग्रह राहु देव हैं। 8 नवंबर को राहु का स्वाति नक्षत्र होने से इस तिथि को यह पूजन अत्यंत लाभदायक माना गया है। कहते हैं कि राहु के स्वामित्व वाले नक्षत्र में जब पूजन किया जाता है, तो राहु का उग्र और भ्रम उत्पन्न करने वाला स्वभाव तुरंत शांत हो जाता है। इस महामुहूर्त में राहु-केतु शांति पूजन से राहु के साथ-साथ केतु के भी दुष्प्रभाव शांत होते हैं मानसिक भ्रम से मुक्ति मिलती है। शिव रुद्राभिषेक राहु के इस भ्रमजाल को काटता है, जिससे व्यक्ति को मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता में अभूतपूर्व सुधार आता है।

शिव रुद्राभिषेक का महत्व

भगवान शिव सभी ग्रहों के स्वामी हैं। अमृत पीने वाले स्वरभानु राक्षस के कटे मस्तक की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने ही उसे छाया ग्रह बनने का आशीर्वाद दिया था। अगर राहु शांति की कामना के साथ राहु पूजन एवं महादेव का रुद्राभिषेक किया जाए तो जातक को अवश्य ही राहु के कष्टों से लाभ मिलता है और भगवान शिव के आशीर्वाद से जीवन में स्थिरता, सफलता और आंतरिक शांति का आगमन होता है।

राहु पैठाणी में यह अनुष्ठान है विशेष

देवभूमि उत्तराखंड का राहु पैठाणी, वह मंदिर है, जिसके बारे में मान्यता है कि स्वरभानु का कटा सिर यानी राहु सुदर्शन चक्र से कटने के बाद यहीं गिरा था। यहीं राहु ने तपस्या कर, भगवान शिव को प्रसन्न कर छाया ग्रह बनने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी मंदिर में महादेव ने राहु को शिवलिंग में वास का भी आशीर्वाद दिया था।

इस वजह से यहां तीव्र राहु ऊर्जा विद्यमान है। इस जगह राहु और भगवान शिव की पूजा से राहु से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।


नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र में राहु का वर्णन मिलता है- 

"महाशिरो महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः।

अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च राहुः शांतिकरोस्तु मे॥"

अर्थ: विशाल मस्तक, विशाल मुख और अपार बल वाले राहु देव, जो भगवान शिव की शरण में जाकर शांत हुए, वे मेरे जीवन के सभी संकटों और दोषों का शमन कर मुझे शांति प्रदान करें।


पूजा के लाभ

1

मानसिक स्पष्टता

राहु के कारण दिमाग में चलने वाले भ्रम, संशय, भय और विचारों के भंवर से राहत मिलती है और मन शांत होने की मान्यता है।

2

सटीक निर्णय क्षमता

सही समय पर सही फैसले लेने की बुद्धि विकसित होती है, जिससे व्यापार, नौकरी और व्यक्तिगत जीवन में नुकसान होने से बचाव होता है।

3

राहु-केतु दोष से मुक्ति

राहु-केतु की महादशा, अंतर्दशाऔर उग्र दृष्टि के कारण आने वाले अचानक कष्ट समाप्त होते हैं।

पूजा प्रक्रिया

1

संकल्प

वैदिक आचार्यों द्वारा यजमान के नाम, गोत्र और राहु दोष निवारण तथा पारिवारिक सुख की मनोकामना के साथ विशेष संकल्प।

2

गणेश एवं नवग्रह पूजन

अनुष्ठान की निर्विघ्न पूर्णता के लिए प्रथम पूज्य श्री गणेश, नवग्रह देवों और राहु-केतु का विशेष पूजन।

3

राहु-केतु महा-मंत्र जाप

सिद्ध राहु पैठाणी विग्रह के समक्ष वैदिक आचार्यों द्वारा राहु और केतु के वैदिक एवं बीज मंत्रों का सस्वर शुद्ध जाप।

4
✦ The Core Ritual

राहु द्वारा स्थापित शिवलिंग पर रुद्राभिषेक

राहु द्वारा स्थापित प्राचीन शिवलिंग पर धाराप्रवाह रुद्राभिषेक एवं रुद्र-सूक्त पाठ।

आपको क्या मिलेगा?

अनुष्ठान का संपूर्ण वीडियो 48 घंटे के भीतर सीधे आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।

मंदिर विवरण

राहु पैठाणी मंदिर

राहु पैठाणी मंदिर

पैठाणी, उत्तराखंड
उत्तराखंड की देवभूमि के पौड़ी गढ़वाल जिले में पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों के पावन संगम के पास स्थित राहु मंदिर (पैठाणी) अत्यंत रहस्यमयी और प्राचीन सिद्ध पीठ है। यह विश्व के गिने-चुने मंदिरों में से एक है, जहां राहु देव की पूजा भगवान शिव के साथ की जाती है। राष्ट्रकूट शैली में बने इस ऐतिहासिक स्थल पर राहु देव का मस्तक एक चट्टान के रूप में स्थापित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां राहु देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके अपने अपराधों की क्षमा…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब

Family Puja

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

ल
ललिता देवी
प्रयागराज
Verified
Private Puja

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

स
सुजाता डलास
शिकागो
Verified
Individual

What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

र
रमेश कुमार
बेंगलुरु
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ल

ललिता देवी

घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।

5.0
स

सुजाता डलास

विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।

5.0
र

रमेश कुमार

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वेदा मंदिर द्वारा पूर्ण वैदिक विधान से होने वाली पूजाओं में शामिल हों, सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति प्राप्त करें।
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