घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
कामाख्या तीर्थ क्षेत्र: 10 महाविद्या शत्रु विनाशक पूजन एवं तंत्रोक्त हवन
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
कामाख्या तीर्थ क्षेत्र की अलौकिक ऊर्जा से प्रत्यक्ष और गुप्त शत्रुओं के षड्यंत्रों का शमन
तंत्र-मंत्र, किया-कराया, प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों का विनाश
ग्रह बाधाओं और मानसिक अशांति से मुक्ति
कोर्ट-केस, झूठे आरोपों और विरोधियों की कुबुद्धि व वाणी का स्तम्भन
दसों महाविद्याओं के संयुक्त आशीर्वाद से अभेद्य 'रक्षा कवच' की प्राप्ति
कामाख्या तीर्थ क्षेत्र: जहांं साक्षात समाहित हैं दसों महाविद्याएं!
सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र में असम के कामाख्या तीर्थ क्षेत्र (गुवाहाटी) को संपूर्ण ब्रह्मांड में तंत्र और शक्ति साधना की सर्वोच्च राजधानी माना गया है।
दसों महाविद्याओं का एक साथ वास: कामाख्या क्षेत्र विश्व का एकमात्र ऐसा सिद्ध तीर्थ क्षेत्र, है जहांं दसों महाविद्याएं (मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) अलग-अलग विग्रहों व स्वरूपों में साक्षात विराजमान हैं।
अत्यंत जाग्रत कौल-तंत्र क्षेत्र: शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से मां सती की देह का छेदन हुआ था, तब इस स्थान पर मां सती का गर्भाशय व योनि भाग गिरा था। इस क्षेत्र को समस्त शक्तियों की उत्पत्ति का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां किया गया तंत्रोक्त हवन तुरंत सिद्ध होता है।
9 नवंबर सोमवती अमावस्या: शक्ति साधना का सर्वोच्च तांत्रिक महत्व
जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'सोमवती अमावस्या' कहा जाता है। कामाख्या धाम में इस दिन पूजा कराने का विशेष महत्व है।
सोमवार भगवान शिव (चंद्रमौली) का दिन है और अमावस्या शिव-शक्ति के मिलन की रात्रि। इस दिन दसों महाविद्याओं का पूजन करने से मानसिक तनाव, अकारण भय और अवसाद समाप्त होता है। इस दिन किया गया पूजन उग्र से उग्र तांत्रिक बाधाओं और ग्रह दोषों को भस्म कर देता है।
शत्रु शमन का अमोघ दिन: तांत्रिक मान्यतानुसार अमावस्या की महारात्रि तंत्र-मंत्र की काट करने के लिए सबसे शक्तिशाली मानी गई है।
दस महाविद्याओं की उत्पत्ति की कथा
सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में दस महाविद्याएं आदि शक्ति (महासती/पार्वती) के दस अति शक्तिशाली और ज्ञान-स्वरूप रूपों का एक समूह हैं। भागवत पुराण और महाभागवत पुराण के अनुसार, इनके प्राकट्य की मुख्य कथा भगवान शिव और माता सती से जुड़ी है:
जब महादेव ने माता सती को निमंत्रण न होने के वजह से पिता, राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जाने से रोका और वह अपनी हठ पर अड़ गए, तब माता सती अत्यंत क्रोधित हो गईं, जिसे देख भगवान शिव वहां से भागने लगे। क्रोध में मां सती के शरीर से एक के बाद एक महाकाली सहित दस भयंकर और दिव्य रूप प्रकट हुए। जिधर भगवान शिव जाते, उनके सामने वे दस रूप आ जाते। माता ने दसों दिशाओं में खड़े होकर उन्हें रोक लिया। माता सती ने महादेव को अहसास कराया कि वे साधारण नारी नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति हैं, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दी।
माता सती के इन्हीं दस उग्र रूपों को 'दस महाविद्या' कहा गया। एक मान्यता यह भी है कि महाभयंकर दुर्गम नामक दैत्य के आतंक और वेदों पर आए संकट को दूर करने के लिए देवताओं की प्रार्थना पर मां सती ने दस महाविद्याओं के रूप में प्रकट होकर उसका नाश किया था।
दस महाविद्याओं का स्वरूप और उनका कार्यक्षेत्र
तंत्र शास्त्र और शाक्त दर्शन में महाविद्याएं केवल पूजनीय देवियां नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांडीय शक्तियों और जीवन के गूढ़ रहस्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं:
मां काली: समय, विनाश और परम चेतना की देवी, जो अहंकार और समय के चक्र को समाप्त करती हैं।
मां तारा: मोक्ष और चेतना की मार्गदर्शिका जो भय और संकट रूपी भव-सागर से पार लगाती हैं।
मां त्रिपुरा सुंदरी (षोडशी): परम सौंदर्य, प्रेम और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का रूप।
मां भुवनेश्वरी: इस संपूर्ण भौतिक जगत और प्रकृति की जननी।
मां छिन्नमस्ता: स्वयं अपना मस्तक काटने वाली देवी, जो यह दर्शाती हैं कि जीवन और चेतना स्वयं के बलिदान से ही निरंतर चलती है।
मां भैरवी (त्रिपुरा भैरवी): तपस्या, उग्र ऊर्जा और आंतरिक ताप से अज्ञान व भय को नष्ट करने वाली शक्ति।
मां धूमावती: विपत्ति, अभाव, दरिद्रता और शत्रुओं का संहार करने वाली उग्र शक्ति।
मां बगलामुखी: वाणी, स्तम्भन और शत्रुओं की गति व कुबुद्धि को रोकने वाली ब्रह्मास्त्र शक्ति।
मां मातंगी: वाणी, संगीत, कला और तांत्रिक ज्ञान की देवी (तांत्रिक सरस्वती)।
मां कमला: तांत्रिक लक्ष्मी, जो भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक वैभव प्रदान करती हैं।
पूजा के लाभ
शत्रु बाधा से पूर्ण सुरक्षा
कामाख्या शक्तिपीठ से संकल्पित इस पूजा से शत्रुओं द्वारा रचे जा रहे षड्यंत्र विफल होते हैं और उनकी कुबुद्धि बंध जाती है।
तंत्र-मंत्र व काले जादू का नाश
कामाख्या धाम के तंत्रोक्त हवन से घर-परिवार पर किया गया कोई भी तांत्रिक प्रयोग या नजर दोष तुरंत भस्म होता है।
कोर्ट-कचहरी व विवादों में विजय
मुकदमेबाजी और प्रशासनिक अड़चनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
आर्थिक व व्यापारिक बंधनों से मुक्ति
व्यापार में आ रही अकारण रुकावटें दूर होती हैं और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
पूजा प्रक्रिया
गणपति व दस महाविद्या आवाहन
सर्वप्रथम विघ्नहर्ता श्री गणेश, त दसों महाविद्याओं का ध्यान व आवाहन
विशेष संकल्प
आपके और आपके परिवार के नाम व गोत्र से विशेष संकल्प
10 महाविद्या मूल मंत्र जाप
विद्वान साधकों व आचार्यों द्वारा दसों देवियों के सिद्ध मूल मंत्रों का पाठ
तंत्रोक्त हवन एवं आरती
कटु द्रव्यों (लाल मिर्च, पीली सरसों), गुग्गुल, तिल, जड़ी-बूटियों और शुद्ध घृत से अग्नि कुंड में आहुतियों के साथ हवन एवं महाआरती
आपको क्या मिलेगा?
इस संपूर्ण अनुष्ठान व तंत्रोक्त हवन का वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा
मंदिर विवरण
कामरूप तीर्थ क्षेत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


