घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
नारायण बलि त्रिपिंडी श्राद्ध पितृ दोष शांति पूजा एवं गंगा दूग्ध अभिषेक
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान के उद्देश्य
कुल में चले आ रहे वंशानुगत पितृ श्राप और सर्व पितृ दोषों से मुक्ति
ज्ञात-अज्ञात, अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों की आत्मा को प्रेत बाधा से मुक्ति व मोक्ष
नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध के माध्यम से तीन पीढ़ियों के पितरों की तृप्ति
मां गंगा के पावन दूध अभिषेक से परिवार में अखंड सुख, शांति, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद
पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि
संतान प्राप्ति में आ रही बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद
सोमवती अमावस्या पर मोक्ष नगरी हरिद्वार में अनुष्ठान का महात्म्य
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को 'सोमवती अमावस्या' कहा जाता है। शास्त्रों में सोमवती अमावस्या को पितृ पक्ष के समान ही पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दोष निवारण के लिए श्रेष्ठ तिथि माना गया है। मान्यता है कि मोक्षदायिनी मां गंगा के तट पर सोमवती अमावस्या के दिन जब नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और मां गंगा का दूध से अभिषेक किया जाता है, तो सैकड़ों वर्षों से भटके हुए पितर भी तृप्त होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर विष्णुलोक (मोक्ष) को प्रस्थान कर जाते हैं।
नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं गंगा दुग्ध अभिषेक का विधान
नारायण बलि पूजा: गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु हुई हो या उनकी अंतिम इच्छाएं अधूरी रह गई हों, तो वे प्रेत योनि में चले जाते हैं। सोमवती तिथि पर भगवान श्रीमन नारायण को साक्षी मानकर की जाने वाली नारायण बलि पूजा अकाल मृत्यु, अनिच्छित मरण या असंतोष के कारण भटक रही आत्माओं को प्रेत योनि से मुक्त कर बैकुंठ धाम भेजती है।
त्रिपिंडी श्राद्ध: पुराणों के अनुसार, जब लगातार तीन पीढ़ियों (पिता, पितामह, प्रपितामह) के पितर तृप्त न हों, या बाल, युवा, वृद्ध अवस्था में मृत आत्माओं को शांति न मिली हो, तो त्रिपिंडी श्राद्ध द्वारा विष्णु स्वरूप सात्विक, ब्रह्मा स्वरूप राजसिक और शिव स्वरूप तामसिक पितरों को तृप्त कर पितृ श्राप मिटाया जाता है। पितृपक्ष की तरह ही सोमवती अमावस्या पितृ पूजाओं के लिए विशेष मानी जाती है।
गंगा दुग्ध अभिषेक: पितरों के उद्धार के लिए पतित-पावनी गंगा मैया का दुग्धाभिषेक करने से पितृ शाप भस्म होकर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
हरिद्वार में गंगा घाट पर अनुष्ठान विशेष क्यों?
हरिद्वार का शाब्दिक अर्थ ही है "भगवान विष्णु (हरि) का द्वार"। नारायण बलि श्राद्ध के बाद तर्पण एवं विसर्जन के लिए हरिद्वार में गंगा घाट सर्वोत्तम स्थल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, पतितपावनी मां गंगा के शांत, सात्विक और आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुष्ठान का विशेष फल मिलता है और उनके पवित्र गंगाजल के स्पर्श मात्र से मृतात्मा की परम तृप्ति हो जाती है। यहां अकाल मृत्यु से मृत जीव के निमित्त गेहूं के आटे या कुशा से कृत्रिम पुतला (शरीर) बनाकर उसका दोबारा शास्त्रोक्त अंतिम संस्कार किया जाता है, जो आत्मा के सभी सांसारिक बंधनों को तोड़ देता है।
पूजा के लाभ
पितृ दोष व कुल-शाप से मुक्ति
पूर्वजों के असंतोष से उत्पन्न सभी प्रकार के पितृ दोष, प्रेत बाधा और वंशिक कष्ट पूरी तरह समाप्त होते हैं।
पितरों को परम शांति व मोक्ष
अतृप्त आत्माओं को भगवान विष्णु के धाम (बैकुंठ) में स्थान मिलता है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजो को आशीर्वाद देते हैं।
वंश वृद्धि व संतान प्राप्ति
पितृ दोष के कारण संतान प्राप्ति में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और योग्य संतान के योग बनते हैं।
पारिवारिक सुख व समृद्धि
घर में हो रही अकारण कलह, बीमारियों पर होने वाले फिजूल खर्च और आर्थिक तंगी का नाश होता है। करियर और व्यवसाय में उन्नति की कामना
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
नाम-गोत्र से आचार्यों द्वारा विशेष संकल्प।
नारायण बलि
आचार्यों द्वारा श्रीमन नारायण को साक्षी मानकर विशेष नारायण बलि पूजा की जाएगी।
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा
ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक तीन पिंडों की स्थापना कर सस्वर वेद मंत्रों के साथ त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन।
गंगा दुग्ध अभिषेक व पितृ तर्पण
हरिद्वार के पावन गंगा तट पर गंगा मैया का गाय के शुद्ध दूध से अभिषेक, तिल-कुश से तर्पण और महाआरती।
आपको क्या मिलेगा?
अनुष्ठान का पूरा स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
गंगा घाट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


