घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
विवाह में आ रहीं बाधा निवारण पूजा
16 सोमवार पंचामृत रुद्राभिषेक
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
विवाह में आ रही अकारण रुकावटों व विलंब की समस्या से बचने के लिए
योग्य व मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए
विवाहित जीवन में आ रही समस्याओं के शमन हेतु
मानसिक दूरियां और तनाव समाप्त कर प्रेम की स्थापना
16 सोमवार पंचामृत रुद्राभिषेक क्यों विशेष है?
कुंडली में ग्रह बाधाओं की वजह से विवाह में अकारण रुकावटों व विवाहित दंपतियों के जीवन में गृह-क्लेश और तनाव जैसी समस्याएं आने लगती हैं। इन समस्याओं से बचने एवं योग्य व मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए भगवान शिव और आदिशक्ति मां पार्वती के आशीर्वाद की परम आवश्यकता होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव को सभी ग्रहों का स्वामी और नियंत्रक माना गया है। मान्यता है कि 16 सोमवार शिव की आराधना एवं पंचामृत अभिषेक से जातक के विवाह मार्ग की सभी रुकावटें, ग्रह-बाधाएं स्वतः ही शांत हो जाती हैं। शिवनगरी काशी के पौराणिक रामेश्वर महादेव मंदिर में विद्वान आचार्यों द्वारा पंचामृत (दूध, दही, घृत, शहद, शक्कर) से किया गया यह रुद्राभिषेक जातक के जीवन में शीघ्र विवाह और सुखद पारिवारिक जीवन का द्वार खोलता है।
इस अनुष्ठान की ऐतिहासिक महिमा
16 सोमवार का अनुष्ठान मनवांछित जीवनसाथी पाने और अखंड सौभाग्य के लिए अचूक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर साधना की थी। मान्यता है कि 16 सोमवार जब भगवान शिव का वैदिक रुद्रसूक्त मंत्रों के साथ पंचामृत से रुद्राभिषेक किया जाता है, तो भगवान आशुतोष तुरंत प्रसन्न होकर साधक की विवाह संबंधी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं।
16 सोमवार के व्रत से जुड़ी कथा के मुताबिक एक निर्धन ब्राह्मण ने सुंदर व सुयोग्य पत्नी की कामना से यह अनुष्ठान और रुद्राभिषेक किया था। उसी समय एक राज्य में राजकुमारी का स्वयंवर चल रहा था। राजा ने नियम रखा कि एक हथिनी जिसके गले में वरमाला डालेगी, राजकुमारी उसी से विवाह करेगी। वह हथिनी अचानक सभा से बाहर निकलकर उस ब्राह्मण युवक के पास गई और उसके गले में माला डाल दी। इस प्रकार 16 सोमवार के प्रभाव से एक साधारण युवक का विवाह राजघराने की कन्या से हुआ।
रामेश्वर महादेव मंदिर की महिमा
भगवान शिव की नगरी काशी में स्थित महादेव मंदिर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की साक्षात प्रतिकृति है। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने वरुणा नदी के तट पर अपने हाथों से बालू का शिवलिंग बनाकर उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर विधि-विधान से पूजा की। भगवान राम द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस सिद्ध पीठ का नाम 'रामेश्वर महादेव' पड़ा।
पूजा के लाभ
शीघ्र विवाह के योग
विवाह में आ रही अप्रत्याशित देरी, रिश्ते टूट जाना या बातचीत न बन पाना जैसी समस्याओं का तत्काल निवारण होता है।
मनवांछित जीवनसाथी
सोलह सोमवार के विशेष प्रभाव से सुयोग्य, चरित्रवान और प्रेम करने वाला जीवनसाथी प्राप्त होता है।
दांपत्य सुख व प्रेम में वृद्धि
विवाहित जातकों के रिश्ते में बनी कटुता, अनबन और तलाक जैसी स्थितियां दूर होकर आपसी सामंजस्य बढ़ता है।
ग्रह दोष शमन
श्रीरामेश्वर महादेव के पूजन से कुंडली के मांगलिक दोष, राहु-केतु दोष और विवाह में बाधक ग्रह शांत होते हैं।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
आचार्यों द्वारा आपके नाम-गोत्र से विशेष संकल्प
रामेश्वर महादेव पंचामृत अभिषेक
पंचामृत से शिवलिंग का धाराप्रवाह अभिषेक।
वैदिक रुद्रसूक्त एवं 16 सोमवार पाठ
ऋत्विक आचार्यों द्वारा महर्षि वेदव्यास रचित रुद्रसूक्त मंत्रों का सस्वर पाठ तथा 16 सोमवार महात्म्य का स्मरण।
आपको क्या मिलेगा?
काशी के सिद्ध रामेश्वर महादेव मंदिर में संपन्न 16 सोमवार पंचामृत रुद्राभिषेक का व्यक्तिगत संकल्पित वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
रामेश्वर महादेव मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


