घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
गजलक्ष्मी मंदिर में धनप्राप्ति कनकधारा स्तोत्र पाठ, अष्टलक्ष्मी पूजन एवं लक्ष्मी-कुबेर ऋण मुक्ति यज्ञ
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
जीवन में धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए
लक्ष्मी-कुबेर यज्ञ के माध्यम से पुराने से पुराने ऋणों (कर्ज) और दरिद्रता से मुक्ति
व्यापार, नौकरी और निवेश में आ रही आर्थिक बाधाओं का पूर्ण शमन
अष्टलक्ष्मी के आशीर्वाद से धन की स्थिरता, आरोग्य, विजय और कुल-वंश में वृद्धि
लाभ पंचमी महामुहूर्त में अनुष्ठान क्यों विशेष है?
ज्योतिष शास्त्र में दीपावली के बाद आने वाली पंचमी तिथि को लाभ पंचमी या श्रीप्रदा कहते हैं, जिसे लक्ष्मी को बांधने वाली तिथि माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन अष्टलक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी चंचलता छोड़कर साधक के घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान में स्थायी रूप से वास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, लाभ पंचमी के दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ और ऋण मुक्ति यज्ञ करने से अग्नि देव के माध्यम से नकारात्मक तरंगें भस्म हो जाती हैं, जिससे रुका हुआ पैसा वापस आता है और नए धन का प्रवाह शुरू होता है।
अष्टलक्ष्मी पूजन का महत्व
लाभ पंचमी तिथि पर महालक्ष्मी के सभी अष्टलक्ष्मी रूपों आदि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी और धन लक्ष्मी रूपों के आशीर्वाद से अष्ट निधि की प्राप्ति होती है-
1- आदि लक्ष्मी आध्यात्मिक बल एवं मानसिक शांति
2- धन लक्ष्मी धन-दौलत, सुख-सुविधाएं
3- धान्य लक्ष्मी अन्न-भोजन और कृषि में बरकत
4- गज लक्ष्मी मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा
5- संतान लक्ष्मी वंश वृद्धि, बच्चों के स्वास्थ्य के लिए
6- वीर लक्ष्मी साहस, पराक्रम एवं मानसिक मजबूती
7- विजय लक्ष्मी हर कार्य में सफलता और जीत
8- विद्या लक्ष्मी बुद्धि, कला, ज्ञान और निर्णय क्षमता
लक्ष्मी-कुबेर ऋण मुक्ति यज्ञ
जब अथक परिश्रम के बाद भी आर्थिक संकट दूर न हो, कर्ज लगातार बढ़ता जाए और उसे चुकाने के मार्ग बंद होते नजर आएं, तो जीवन मानसिक और सामाजिक रूप से भी प्रभावित होने लगता है। मान्यता है कि यह महालक्ष्मी और कुबेर देव की कृपा के अभाव के कारण हो सकता है। लक्ष्मी-कुबेर यज्ञ से जीवन में अकूत धन-धान्य, समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।
धनप्राप्ति कनकधारा स्तोत्र पाठ
सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि,
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि ।
त्वद्वन्दनानि दुरितोद्धरणोद्यतानि,
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥
अर्थ: कनकधारा स्तोत्र के इस श्लोक का अर्थ है- हे कमल जैसी आंखों वाली मां लक्ष्मी! आपकी वंदना और आराधना समस्त संपत्ति को देने वाली, सभी इंद्रियों को आनंद देने वाली और बड़े से बड़ा साम्राज्य व वैभव दान करने की क्षमता रखती है। यह पूजा सभी पापों और कष्टों को तुरंत हर लेती है।
मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने जब एक गरीब दुखियारी महिला के घर भिक्षा मांगी, तो उस महिला ने असमर्थता जताते हुए उन्हें केवल एक सूखा आंवला भेंट किया। तब शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए तत्काल इस दिव्य स्तोत्र की रचना की थी, जिससे उस महिला के घर सोने (कनक) के आंवलों की वर्षा हुई थी।
पूजा के लाभ
भारी कर्ज व ऋण से मुक्ति
लंबे समय से चले आ रहे लोन और कुरुणों के बोझ से राहत मिलती है तथा कर्ज चुकाने के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं।
कनकधारा प्रभाव से धन लाभ
आदि शंकराचार्य रचित सिद्ध कनकधारा स्तोत्र के प्रभाव से आर्थिक संकट दूर होते हैं और आकस्मिक धन आगमन के योग बनते हैं।
व्यापार व करियर में उन्नति
व्यापारिक घाटा समाप्त होता है, नए ग्राहक मिलते हैं और नौकरी में पदोन्नति के द्वार खुलते हैं।
पारिवारिक सुख, शांति व आरोग्य
घर से नकारात्मक ऊर्जा और कलह का नाश होता है तथा सदस्यों में परस्पर प्रेम और उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
आपके नाम-गोत्र से आपकी आर्थिक समृद्धि की मनोकामना के साथ वेदोक्त संकल्प।
गजलक्ष्मी अभिषेक
पावन जल, केसर और दूध से मां गजलक्ष्मी का महा-अभिषेक।
अष्टलक्ष्मी आह्वान एवं पूजन
आठों महालक्ष्मी स्वरूपों का आह्वान एवं विधिवत पूजन।
कनकधारा स्तोत्र पाठ
आचार्यों द्वारा कनकधारा स्तोत्र का पाठ।
लक्ष्मी-कुबेर ऋण मुक्ति यज्ञ
कमल गट्टे, शुद्ध घृत, श्रीफल और जड़ी-बूटियों से महालक्ष्मी और धनपति कुबेर के लिए आहुतियां।
पूर्णाहुति एवं महाआरती
यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद महालक्ष्मी से धन, वैभव और ऋण मुक्ति की प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
सिद्ध गजलक्ष्मी मंदिर उज्जैन में संपन्न कनकधारा स्तोत्र पाठ, अष्टलक्ष्मी पूजन और लक्ष्मी-कुबेर यज्ञ का व्यक्तिगत वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
गजलक्ष्मी मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


