घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
कालसर्प दोष शांति महापूजा एवं राहु-केतु शांति रुद्राभिषेक
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
कालसर्प दोष, राहु-केतु महादशा व अंतर्दशा के दुष्प्रभावों का स्थायी शमन
व्यापार में अचानक घाटा, मार्केट में नुकसान और कर्ज की तंगी से सुरक्षा
विवाह में अकारण देरी, दाम्पत्य क्लेश और संतान बाधाओं का निवारण
अज्ञात शत्रु, डिप्रेशन और राहु के भ्रम जाल से मुक्ति
18 नवंबर: शतभिषा नक्षत्र में पूजा का महत्व
वैदिक ज्योतिष में शतभिषा नक्षत्र के स्वामी स्वयं राहु देव हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब भी राहु देव अपने ही स्वामित्व वाले शतभिषा नक्षत्र में गोचर करते हैं, तो उनकी ऊर्जा अत्यधिक शक्तिशाली हो जाती है। इस काल में जब राहु का पूजन किया जाता है, तो राहु का उग्र और क्रूर प्रभाव तुरंत शांत हो जाता है। यह दिन जीवन के कड़े से कड़े 'कर्म-बंधन' और राहु-केतु के विषैले प्रभाव को काटने का सबसे अचूक अवसर है।
कालसर्प दोष कैसे बनता है? (राहु-केतु का सर्प योग)
जब जन्मकुंडली में सभी 7 मुख्य ग्रह राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) के बीच आ जाते हैं, तब 'कालसर्प दोष' बनता है। इसके कारण इंसान कितनी भी मेहनत कर ले, उसे अंतिम समय पर असफलता ही हाथ लगती है। अचानक बड़े आर्थिक झटके, वैवाहिक जीवन में तनाव और रात में डरावने सपने (विशेषकर सपने में सांप दिखना) इसके मुख्य लक्षण हैं।
राहु पैठाणी मंदिर का अलौकिक इतिहास
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों के संगम पर स्थित यह धाम ऐसा सिद्ध पीठ है जहां समुद्र मंथन के बाद भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटा राहु (अमृत पीने वाले स्वरभानु राक्षस) का मस्तक गिरा था। यहां स्वरभानु ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उनसे छायाग्रह होने का वरदान प्राप्त किया था और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगी थी। साक्षात राहु देव की इस तपोभूमि पर शतभिषा नक्षत्र में पूजा कराने से राहु-केतु के सभी दोष तत्काल शांत हो जाते हैं।
पूजा के लाभ
12 प्रकार के कालसर्प दोषों से मुक्ति
अनन्त, वासुकि, तक्षक आदि सभी कालसर्प योगों का घातक प्रभाव समाप्त होता है।
करियर व व्यापार में अचानक उछाल
मान्यता है कि कालसर्प दोष शांत होने पर नौकरी में प्रमोशन के मार्ग खुलते हैं, अटका हुआ धन वापस मिलता है और व्यापार में प्रगति होती है।
मानसिक भ्रम व भय का अंत
राहु जनित अनिद्रा, डिप्रेशन, एंग्जायटी और राहु के कारण आने वाले डरावने सपनों से मुक्ति मिलती है।
विवाह एवं संतान योग
राहु-केतु के कारण विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति एवं शिव-नाग पूजन
विघ्नहर्ता श्री गणेश, भगवान शिव (नागभूषण) और नवनागों का आवाहन।
नाम-गोत्र संकल्प
कालसर्प दोष शांति की विशेष कामना के साथ आचार्यों द्वारा संकल्प।
राहु-केतु महा-मंत्र जाप
राहु के सिद्ध पैठाणी विग्रह के समक्ष वैदिक आचार्यों द्वारा राहु-केतु वैदिक मंत्रों का जाप।
शतभिषा विशेष कालसर्प हवन
विशेष जड़ी-बूटियों एवं नाग-नागिन के जोड़ों के साथ अग्नि में आहुतियां।
पूर्णाहुति व महाआरती
आरती के साथ राहु देव और भगवान शिव से आपके कल्याण व दोष-मुक्ति की प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
पूजन, हवन और आरती का पूरा वीडियो 48 घंटे के भीतर आपको WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
राहु पैठाणी मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


