घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
देवउठनी एकादशी पर सर्वोच्च मोक्ष तीर्थ गया में सर्व पितृ दोष शांति महापूजा
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
सर्व पितरों को संतुष्ट करने वाली देवउठनी एकादशी तिथि पर महाश्राद्ध
पितरों की आत्मा को सर्वोच्च मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति के लिए
पितृ दोषों से मुक्ति पाकर परिवार में सुख, शांति, वंश वृद्धि और आपसी सामंजस्य
ज्ञात-अज्ञात एवं अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को तृप्ति
पितृ दोष और पारिवारिक अशान्ति के लक्षण
शास्त्रों के अनुसार जब पितर असंतुष्ट होते हैं, तो परिवार में कई समस्याएं आने लगती हैं—
संतान की प्रगति में रुकावटें आती हैं
घर बेवजह क्लेश और मतभेद बना रहता है
कठिन परिश्रम के बाद भी कार्यों में असफलताएं
अकारण भय बना रहता है
देवउठनी एकादशी पर तर्पण का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और उनके जागते ही ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध पितृ लोक में रह रहे पूर्वजों को तृप्त कर देता है। यदि किसी कारणवश पूर्वज कष्ट में हैं या उनकी आत्मा भटक रही है, तो इस दिन किया गया जल तर्पण उन्हें विष्णु लोक की ओर ले जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन मोक्ष तीर्थों पर श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण और दान केवल एक दिन का कर्म नहीं है, बल्कि यह पूरे वर्ष में किए जाने वाले पितृ-कर्म के बराबर महापुण्य प्रदान करता है। जो लोग पूरे वर्ष या पितृपक्ष में तर्पण नहीं कर पाते, उनके लिए यह पावन तिथि समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों की शांति तथा पितृ दोषों से मुक्त होने व पूर्वजों का अक्षय आशीर्वाद पाने का सबसे सुलभ और फलदायी अवसर है।
गया धाम की पौराणिक कथा एवं ऐतिहासिक महत्व
गया जी को संपूर्ण पृथ्वी पर पितरों के मोक्ष का सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च तीर्थ माना गया है। पुराणों के अनुसार, गयासुर नाम का एक परम वैष्णव असुर था, जिसने कठोर तपस्या करके यह वरदान प्राप्त किया कि जो भी उसे देखेगा या उसका स्पर्श करेगा, उसे मोक्ष मिल जाएगा। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा। तब भगवान विष्णु ने गयासुर की पीठ पर अपने चरण रखकर उसे स्थिर किया और उसे वरदान दिया कि यह स्थान 'गया तीर्थ' के नाम से जाना जाएगा। भगवान विष्णु के चरण-चिह्न आज भी यहां विष्णुपद मंदिर में शिला रूप में विराजमान हैं।
मान्यता है कि विष्णुपद वेदी पर पिंडदान करने से पितरों को सीधे भगवान विष्णु के चरणों में स्थान मिलता है। त्रेतायुग में माता सीता ने पितृ ऋणों से मुक्ति पाने के लिए गया जी में ही पिंडदान किया था।
पूजा के लाभ
पितरों को मोक्ष व सर्व पितृ ऋण मुक्ति
विष्णुपद वेदी पर अर्पित पिंड से पितरों को बार-बार के जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और जातक को जाने-अनजाने में हुए पितृ अपराधों से मुक्ति मिलती है।
पारिवारिक सामंजस्य और शांति
घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
बाधाओं और संकटों का शमन
व्यापार, नौकरी और करियर में आ रही अकारण रुकावटें समाप्त होती हैं।
संतान सुख एवं वंश वृद्धि
प्रसन्न पितर अपने वंशजों को दीर्घायु, आरोग्य और संतति का आशीर्वाद देते हैं।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प:
आचार्य द्वारा आपके नाम, गोत्र और पूर्वजों के स्मरण के साथ विधिवत संकल्प लिया जाएगा।
पितृ आवाह्न एवं मंत्र पाठ:
ऋग्वेद व यजुर्वेद के श्राद्ध सूक्तों द्वारा कुल के सभी पितरों का आह्वान और आदरपूर्वक स्थान अर्पण।
तर्पण
फल्गु नदी के पवित्र जल, कुशा और काले तिल से पितृ तर्पण
पूर्णाहुति एवं आशीर्वाद प्रार्थना
महापूजा की पूर्णाहुति कर भगवान विष्णु और पितरों से आपके पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
गया जी में सर्व पितृ शांति महापूजा का वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
विष्णुपद क्षेत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


