घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
पितृ दोष शांति महापूजा एवं काशी गंगा आरती
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पूजा का महत्व
पितृ दोष के लक्षण
पितृ दोष हों तो जीवन में कई गंभीर समस्याएं आती हैं:
घर के सदस्यों का अकारण बीमार रहना या मानसिक तनाव में रहना
परिवार में आपसी स्नेह की कमी, बार-बार गृहक्लेश और अशांति का माहौल
तरक्की रुक जाना, धन का अकारण पानी की तरह बहना और कार्यों में असफलता
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
पितृ दोष शमन: पिशाच मोचन कुंड पर तर्पण व पूजन द्वारा असंतुष्ट और प्रेत योनि में भटकी आत्माओं का उद्धार करना।
गंगा आरती द्वारा मोक्ष: पावन गंगा आरती अर्पित कर पितरों को सीधे शिवलोक व बैकुंठ धाम का मार्ग दिखाना।
पारिवारिक कल्याण: पूर्वजों के दिव्य आशीर्वाद से संतान सुख, स्त्रियों के उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति।
कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर इस अनुष्ठान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर किया गया पितृ दोष शांति अनुष्ठान पितृ पक्ष के समान ही फल देता है। मान्यता है कि पितृ दोष शांति पूजा से कुंडली में मौजूद पितृ दोष या उससे जुड़े आर्थिक संकट या कर्ज से राहत मिलती है। जिससे अकारण तरक्की में आ रही बाधाएं समाप्त होती है और उन्नति के मार्ग खुलते हैं। कार्तिक पूर्णिमा तिथि पितरों को 'यमलोक के अंधकार से निकालकर मोक्ष की ओर भेजने' का महा-अवसर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में युद्ध की समाप्ति के बाद, पांडव अपने सगे-संबंधियों, गुरुओं और लाखों सैनिकों की मृत्यु से अत्यंत दुखी थे। उनके मन में आत्मग्लानि और पितृ दोष का भय था, क्योंकि युद्ध में उनके अपने ही गोत्र के लोग मारे गए थे। तब भगवान श्रीकृष्ण के परामर्श पर पांडवों ने कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर ही महाभारत युद्ध में मारे गए सभी दिवंगतों और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक पिंड दान, तर्पण और दीपदान किया था।
पिशाच मोचन कुंड एवं काशी की महिमा
काशी (वाराणसी) भगवान शिव की मोक्ष नगरी है। यहां स्थित पिशाच मोचन कुंड गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित संपूर्ण ब्रह्मांड का वह सिद्ध स्थान है, जहां सभी प्रकार के पितृ दोष, प्रेत बाधा और उग्र पितृ दोषों का शमन होता है। भगवान शिव की नगरी में संपूर्ण विधान से श्राद्ध कर्म किया जाए तो पितृ से मुक्ति मिलने के साथ ही, पितरों को भी मोक्ष प्राप्त होता है।
महा गंगा आरती एवं पितृ शांति का योग
पूजन के पश्चात काशी के पवित्र गंगा तट पर पितरों के कल्याण के संकल्प से की जाने वाली महा गंगा आरती का विशेष महत्त्व है। मां गंगा मोक्ष दायिनी हैं, जो राजा भगीरथ के पितरों का उद्धार करने ही धरती पर आई थीं। पिशाच मोचन पर पितृ दोष शांति के बाद गंगा जी की आरती अर्पित करने से पितरों के मोक्ष का मार्ग प्रकाशित होता है और जातक का परिवार सभी पापों व संकटों से मुक्त हो जाता है।
कहते हैं जिसकी काशी में मृत्यु होती है, उसे मोक्ष मिलता है, लेकिन काशी से बाहर मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों को मोक्ष दिलाने के लिए यहां किए जाने वाले पितृ कर्म अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
पूजा के लाभ
देव ऋण से पूर्ण मुक्ति
प्रकृति और देवताओं के प्रति शेष रह गए ऋण समाप्त होते हैं और उनका अमर आशीर्वाद मिलता है।
स्वास्थ्य व पारिवारिक शांति
घर के सदस्यों का स्वास्थ्य सुधरता है और पारिवारिक जीवन में सुख-सौहार्द आता है।
मानसिक व आर्थिक राहत
अकारण हो रहे नुकसान, कर्ज और मानसिक अशान्ति और गृह क्लेश से स्थायी मुक्ति मिलती है।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
पितृ दोष निवारण हेतु आपके और आपके पूर्वजों के नाम-गोत्र के साथ आचार्यों द्वारा संकल्प
पिशाच मोचन जल शुद्धि
पवित्र कुंड के जल से स्थान एवं पूजन सामग्री का शुद्धिकरण
पितृ एवं मातृ आवाह्न
पितृ दोषों से मुक्ति के लिए ज्ञात-अज्ञात पितरों का विधिवत आह्वान
तर्पण
शास्त्रोक्त विधि से तिल, कुशा और गंगाजल द्वारा पितरों का तर्पण
महा गंगा आरती
पितरों के मोक्ष एवं कुल कल्याण हेतु गंगा तट पर विधिवत महा आरती
आपको क्या मिलेगा?
पिशाच मोचन कुंड पर संपन्न हुए पितृ दोष शांति पूजन और गंगा आरती का पूरा वीडियो 48 घंटे के अंदर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
पिशाच मोचन कुंड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


