घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
मां काली, मां बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच पाठ एवं तंत्रोक्त हवन
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
मुकदमों में सफलता और विरोधियों के षड्यंत्रों का नाश
तंत्र बाधा, नजर दोष, ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा का दोगुने वेग से स्थायी विनाश
त्रि-शक्तियों की कृपा से परिवार के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा चक्र
राजनीति, व्यापार, कानूनी मामलों और करियर में विरोधियों पर विजय प्राप्ति का आशीर्वाद
काली चौदस एवं सोमवती अमावस्या तिथि पर त्रि-शक्ति की पूजा का महत्व
कार्तिक मास में दिवाली से ठीक एक दिन पहले आने वाली चौदस तिथि को काली चौदस कहते हैं। यह तिथि शक्ति साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। काली चौदस तिथि पर विशेष रूप से मां महाकाली की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां काली की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट, अज्ञात भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां (नेगेटिव एनर्जी) दूर हो जाती हैं। वहीं, शास्त्रों में अमावस्या तिथि तंत्र साधना, गुप्त बाधओं और उग्र शक्तियों की पूजा के लिए वर्ष की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण तिथियों में एक मानी जाती है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, जिससे ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मानसिक चेतना का एक विशेष संतुलन बनता है। शास्त्रों के अनुसार, इस तिथि पर किए गए शक्ति के उग्र रूपों के लिए किए गए पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं। अगर अमावस्या सोमवार को पड़े तो इसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। सोमवती अमावस होने पर यह तिथि शिव-शक्ति की कृपा वाला महामुहूर्त बन जाता है।
मान्यता है कि, इन दोनों शक्ति साधना की परम तिथियों पर मां काली, मां बगलामुखी व मां प्रत्यंगिरा की संयुक्त पूजा, कवच पाठ एवं तंत्रोक्त हवन से जीवन में आ रही सभी बाधाओं का नाश हो जाता है तथा त्रि-शक्तियों की कृपा से परिवार के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा चक्र का निर्माण होता है।
मां काली, मां बगलामुखी व मां प्रत्यंगिरा की दिव्य महिमा
मां काली: शास्त्रों में मां काली को काल की स्वामिनी और ब्रह्मांड की आदि ऊर्जा माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब दारुक नाम के शक्तिशाली असुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया, तब उसके खौफ से देवता स्वर्ग से भागकर महादेव के पास पहुंचे। देवताओं ने महादेव को बताया कि दारुक के भयंकर तांत्रिक बंधनों और कुदृष्टि ने उन्हें शक्तिहीन बना दिया है। अपने प्रिय देवताओं की यह दशा देखकर भगवान शिव के अनुरोध पर मां पार्वती ने अपने महाकाली रूप को प्रकट किया। मां काली का स्वरूप इतना ओजस्वी और विकराल था कि उन्होंने असुरों द्वारा छोड़ी गई उस संपूर्ण बुरी नजर और नकारात्मक शक्ति को हवा में ही भस्म कर दिया। मां ने दारुक का वध कर देवताओं को हमेशा के लिए अभेद्य रक्षा प्रदान की।
मां बगलामुखी: शास्त्रों में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं की 8वीं शक्ति 'ब्रह्मास्त्ररूपिणी' कहा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब मदनासुर दैत्य को ब्रह्माजी से वरदान मिला कि उसका बोला हर शब्द सत्य होगा, तो उसने अपनी वाक्-सिद्धि से तबाही मचा दी। वह केवल बोलकर ऋषियों और राजाओं को भस्म कर देता था। तब देवताओं की पुकार पर मां पीताम्बरा मां बगलामुखी प्रकट हुईं और जैसे ही मदनासुर ने देवी पर प्रहार करने के लिए मुंह खोला, मां बगलामुखी ने उसकी जीभ खींचकर उसकी शक्ति का 'स्तम्भन' (पंगु) कर दिया और गदा से उसका अंत किया। मां का यही स्तम्भन चमत्कार आज भी शत्रुओं, मुकदमों और विरोधियों की जुबान व कुबुद्धि को बांध देता है।
मां प्रत्यंगिरा: शास्त्रों में मां प्रत्यंगिरा को सबसे तीव्र और उग्र शक्तियों में से एक माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, रामायण युद्ध के दौरान मेघनाद युद्ध में पराजित होने की स्थिति में इन्हीं देवी का गुप्त अनुष्ठान व निकुंभिला यज्ञ करने जा रहा था। मान्यता है कि यदि मेघनाद यह अनुष्ठान पूरा कर लेता, तो उसे युद्ध में मारना असंभव हो जाता। इसीलिए विभीषण जी की सलाह पर भगवान लक्ष्मण ने मेघनाद के इस यज्ञ को पूरा नहीं होने दिया। मां प्रत्यंगिरा की महिमा यह है कि ये शत्रुओं द्वारा किए गए तंत्र व षड्यंत्र के प्रहार को रोकती ही नहीं, बल्कि दोगुने वेग से प्रहार करने वाले पर ही उलट देती हैं।
पूजा के लाभ
अभेद्य त्रि-शक्ति रक्षा कवच
मां काली, मां बगलामुखी और मां प्रत्यंगिरा का सुरक्षा घेरा जातक और उसके परिवार को हर संकट से सुरक्षित रखता है।
शत्रुओं और मुकदमों पर पूर्ण विजय
कोर्ट-कचहरी के विवादों, व्यापारिक प्रतिस्पर्धियों और गुप्त शत्रुओं की चालें विफल होती हैं तथा उनकी बुद्धि कुंठित हो जाती है।
समृद्धि और धन-धान्य का आगमन
जीवन में आ रही आर्थिक रुकावटें दूर होती हैं, नए आय के स्रोत बनते हैं और व्यापार व नौकरी में अपार सफलता प्राप्त होती है।
भय, तनाव और मानसिक अशांति का नाश
अज्ञात भय, चिंता और अवसाद दूर होता है तथा जीवन में आत्मबल और सकारात्मकता का संचार होता है।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
नाम- गोत्र से शत्रु विजय, सर्व-बाधा शांति और अखंड समृद्धि का विशेष संकल्प।
गणपति एवं नवग्रह आवाहन
विघ्नहर्ता श्री गणेश, क्षेत्रपाल भैरव बाबा और नवग्रहों का पूजन व कलश स्थापना।
मां काली, मां बगलामुखी व प्रत्यंगिरा कवच पाठ
वैदिक आचार्यों द्वारा मां बगलामुखी और महा-प्रत्यंगिरा स्तोत्र व कवच का सस्वर पाठ।
तंंत्रोक्त हवन
विशेष तांत्रिक विधि से विशेष हवन सामग्रियों द्वारा शत्रु बुद्धि विनाशिनी महाअग्नि में आहुतियां।
पूर्णाहुति व महाआरती
त्रि-शक्तियों की आरती के साथ जातक की सुरक्षा और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
पूजा का स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
पांडव यज्ञशाला, कालीघाट शक्तिपीठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

