घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
छठ महापर्व संतान-प्राप्ति एवं छठी मईया अर्घ्य सेवा महाअनुष्ठान
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
संतान प्राप्ति का आशीर्वाद
संतान के आरोग्य, दीर्घायु और तेजस्वी होने के लिए छठी मईया एवं सूर्य देव की कृपा
बच्चों को हर प्रकार के रोग-शोक, बुरी नजर और अकाल संकटों से अभेद्य सुरक्षा के लिए
परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना के लिए
छठ महापर्व की महिमा
छठ महापर्व लोक आस्था का एकमात्र ऐसा पर्व है जहां उगते हुए सूर्य से पहले डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दी जाती है। सूर्य उपासना और देवी षष्ठी की पूजा का यह महापर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व पर लाखों सुहागिन महिलाएं पुत्र प्राप्ति और संतानों की दीर्घायु की कामना के साथ सृष्टि की मूल प्रकृति के छठे अंश से प्रकट छठी मईया की कठोर उपासना करती हैं। यह अकेला पर्व है, जिसमें उगते हुए सूर्य के साथ-साथ डूबते हुए सूर्य को भी पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रकृति देवी के छठे अंश और ब्रह्मा जी की मानस पुत्री छठी मईया संतानों की रक्षक, उन्हें दीर्घायु बनाने वाली और परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाली देवी हैं। कहते हैं कि इस महापर्व पर मां गंगा के जल से सूर्य देव को संध्या/प्रातः अर्घ्य अर्पित किया जाता है और छठी मईया की उपासना की जाती है, तो संतान सुख की प्राप्ति में आ रही हर रुकावट नष्ट हो जाती है एवं संतानों को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
छठी मईया की अलौकिक महिमा
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, प्रियव्रत नाम के एक राजा थे। विवाह के कई वर्षों बाद भी संतान न होने पर राजा अत्यंत दुखी थे। राजा का दुःख देखकर महर्षि कश्यप ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ कराने की सलाह दी। महर्षि की सलाह पर राजा ने यज्ञ करवाया। यज्ञ के प्रभाव से महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, परंतु वह शिशु मृत पैदा हुआ। इस भयंकर दुख से व्याकुल होकर राजा प्रियव्रत अपने प्राण त्यागने का निश्चय कर श्मशान चले गए।
जैसे ही राजा स्वयं को समाप्त करने लगे, तभी आकाश मार्ग से एक अत्यंत दिव्य और तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। राजा ने हाथ जोड़कर देवी से उनका परिचय पूछा। देवी ने कहा कि मैं ब्रह्मा जी की मानस पुत्री 'षष्ठी' हूं। संपूर्ण संसार के बालकों की रक्षा करना और निःसंतान को संतान देना मेरा मूल स्वभाव है। जो भी मेरी भक्तिपूर्वक पूजा करता है, मैं उसे उत्तम और दीर्घायु संतान प्रदान करती हूं।
ऐसा कहकर देवी षष्ठी ने उस मृत बालक को स्पर्श किया, जिससे वह बालक साक्षात जीवित हो उठा। राजा प्रियव्रत अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को देवी षष्ठी का भव्य उत्सव मनाया। वही देवी षष्ठी लोकभाषा में 'छठी मईया' के नाम से पूजित हुईं।
पूजा के लाभ
संतान प्राप्ति का वरदान
छठी मईया के आशीर्वाद से निःसंतान दंपत्तियों की सूनी गोद भरती है और शीघ्र संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
संतान का उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु
छठी मईया की कृपा से संतानों को निरोगी काया, लंबी आयु और तेजस्वी बुद्धि की प्राप्ति होती है।
बच्चों की सुरक्षा
छठी मईया का अभयदान बच्चों को बुरी नजर, गंभीर बीमारियों और अकाल संकटों से हमेशा सुरक्षित रखता है।
पारिवारिक समृद्धि
घर में वंश वृद्धि के साथ-साथ सुख, शांति और मांगलिक कार्यों की निरंतरता बनी रहती है।
पूजा प्रक्रिया
नाम-गोत्र संकल्प
आपके नाम और गोत्र का उच्चारण कर संतान-प्राप्ति, वंश वृद्धि और संतान के उत्तम स्वास्थ्य हेतु आचार्यों द्वारा विशेष संकल्प।
छठी मईया विशेष पूजन व दउरा सेवा
ऋतु फल, ठेकुआ, गन्ना, नारियल और विशेष सामग्रियों से सजी सूप/दउरा का आचार्यों द्वारा विधि-विधान से अर्पण।
गंगा जल में सूर्य अर्घ्य अर्पण
काशी के अस्सी घाट पर पावन गंगा जल में खड़े होकर आचार्यों द्वारा दूध, जल, रौली और लाल पुष्पों से अस्ताचलगामी/उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य दान।
आपको क्या मिलेगा?
गंगा तट पर किए गए पूजन का पूरा स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
अस्सी घाट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

