घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
काशी देव दीपावली पंचदेव ऐश्वर्य-प्राप्ति महायज्ञ एवं 108 गंगा दीप दान
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
दरिद्रता, कर्ज और आर्थिक तंगी से मुक्ति व धन-लक्ष्मी के आगमन की कामना
पंचदेवों (शिव, विष्णु, दुर्गा, सूर्य, गणेश) से संपूर्ण पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद
108 दीपों के दान से जन्म-जन्मांतर के पापों, ग्रह बाधाओं व पितृ दोषों से मुक्ति की प्रार्थना
घर में सकारात्मक ऊर्जा, आरोग्य, ऐश्वर्य और भगवान भोलेनाथ व माता लक्ष्मी की अखंड कृपा
कार्तिक पूर्णिमा महातिथि पर इस दिव्य अनुष्ठान की महिमा
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा तिथि को वर्ष की सबसे पवित्र और फलदायी महातिथियों में से एक माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से पूर्ण व पृथ्वी के सबसे करीब होता है और इसकी किरणें अमृत तुल्य मानी जाती हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात स्वर्ग से 33 करोड़ देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर आते हैं और महादेव की नगरी काशी के घाटों पर दीप जलाकर अपनी जीत की खुशी प्रकट करते हैं। कहते हैं कि देव दीपावली के दिन देवता अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और प्रसन्नता के इसी क्षण में वे पृथ्वी वासियों पर अपनी कृपा और आशीर्वाद की वर्षा करते हैं। मान्यता है कि शिव और नारायण दोनों के पूजन की विशेष तिथि पर साक्षात महादेव की नगरी काशी के पंच रत्न मंदिर में पंचदेवों की आहुतियों से किया गया महायज्ञ जीवन के पांचों स्तंभों—ज्ञान, तेज, आरोग्य, धन और मोक्ष को जाग्रत करता है। इसके साथ ही पवित्र पतित पावनी मां गंगा की धारा में समर्पित 108 दीपक जातक के कुल का नाम रोशन करते हैं और जीवन से समस्त दरिद्रता व अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ऐश्वर्य की ज्योति जलाते हैं।
पंचदेव ऐश्वर्य-प्राप्ति महायज्ञ एवं 108 गंगा दीप दान का अलौकिक प्रभाव
सनातन धर्म में किसी भी कार्य की पूर्णता और सर्वांगीण समृद्धि के लिए 'पंचदेव' यानी गणपति, सूर्य, विष्णु, शिव और शक्ति की पूजा का विधान है। मान्यता है कि जब देव दीपावली के महामुहूर्त पर इन पांचों शक्तियों की एक साथ अग्नि के माध्यम से पूजा की जाती है, तो व्यक्ति के जीवन में पंचतत्वों यानी भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर का संतुलन स्थापित होता है। जिसमें धन-धान्य, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति, सुखी परिवार और यश (कीर्ति) का आशीर्वाद मिलता है तथा जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होने की मान्यता है। इसके साथ ही अस्सी घाट पर 108 दीप दान से जातक के कुल का नाम रोशन करते हैं। कहते हैं कि यह अनुष्ठान माता लक्ष्मी और कुबेर देव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए जो साधक कार्तिक पूर्णिमा की रात 108 दीप दान करता है, उसके जीवन से दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है और धन के नए मार्ग खुलते हैं।
काशी देव दीपावली और असी घाट की अलौकिक पौराणिक कथा
शिव पुराण और काशी खंड के अनुसार, प्राचीन काल में त्रिपुरासुर नाम के तीन भयंकर असुर भाइयों ने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर तीन उड़ने वाले नगर (त्रिपुर) प्राप्त कर लिए थे। इन असुरों ने तीनों लोकों में अत्याचार मचा दिया और देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया।
समस्त देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब श्री हरि विष्णु के परामर्श पर सभी देवता भगवान शिव की शरण में मोक्ष नगरी काशी आए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने अपने अमोघ बाण से त्रिपुरासुर का वध किया और तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त कराया।
असुरों पर विजय और तीनों लोकों की रक्षा की प्रसन्नता में साक्षात ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और समस्त 33 कोटि देवी-देवता स्वर्ग से उतरकर भगवान शिव की नगरी काशी पहुंचे। उन्होंने काशी के पवित्र गंगा तटों (असी घाट से लेकर पंचगंगा घाट तक) को करोड़ों दीपों से जगमग कर दिया और विजयोत्सव मनाया। तभी से कार्तिक पूर्णिमा की यह तिथि 'देव दीपावली' कहलाई। मान्यता है कि आज भी कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि समस्त देवी-देवता महादेव की नगरी काशी दीपावली मनाने आते हैं। कहते हैं कि इस पावन रात्रि में काशी के असी घाट पर किया गया दीप दान और पंचदेव महायज्ञ साक्षात देवताओं द्वारा स्वीकार किया जाता है, जिससे जातक का घर धन, धान्य और समृद्धि से भर जाता है।
पूजा के लाभ
अखंड धन व ऐश्वर्य प्राप्ति का आशीर्वाद
मान्यता है कि महालक्ष्मी और पंचदेवों के आशीर्वाद से धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं तथा स्थिर संपत्ति की प्राप्ति होती है।
व्यापारिक व व्यावसायिक उन्नति की कामना
व्यापार में लंबे समय से रुका हुआ पैसा वापस मिलता है और घाटे से उबारने में मदद मिलती है।
जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति का आशीर्वाद
108 दीप दान से अनजाने में हुए पाप, ग्रह-दोष और पितृ-दोष शांत होकर शुभ फल देने लगते हैं।
दैवीय सुरक्षा चक्र
पंचदेवों की संयुक्त ऊर्जा से घर-परिवार पर आने वाली भावी विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति स्मरण व पंचदेव आवाहन
सर्वविघ्नहर्ता श्री गणेश, भगवान विष्णु, महादेव, आद्यशक्ति और भगवान सूर्यदेव का विधिवत पूजन व स्थापन।
नाम-गोत्र संकल्प
आचार्यों द्वारा आपके नाम-गोत्र से विशेष वैदिक संकल्प।
पंचदेव ऐश्वर्य-प्राप्ति महायज्ञ
वेद-मंत्रों के साथ कमल गट्टा, घृत, केसर, अक्षत एवं विशेष श्री-सूक्त मंत्रों की आहुतियों से महायज्ञ।
108 गंगा दीप दान
अस्सी घाट पर मां गंगा की पावन धारा में आपके नाम से 108 दीपकों का मंत्रोच्चार के साथ दान।
पूर्णाहुति, आरती व आशीर्वाद
महायज्ञ की पूर्ण आहुति, काशी विश्वनाथ व पंचदेवों की भव्य आरती एवं क्षमा प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
पूजा, महायज्ञ और 108 दीप दान का स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
पंच रत्न मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

