घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
21 द्रव्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग रुद्राभिषेक एवं 11,000 शिव पंचाक्षरी मंत्र जाप
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पूजा का महत्व
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग रुद्राभिषेक एवं शिव पंचाक्षरी मंत्र जाप का उद्देश्य
असाध्य रोगों से मुक्ति और निरोगी काया का आशीर्वाद
दरिद्रता का नाश, धन-धान्य एवं ऐश्वर्य की कामना से शिव साधना
जीवन में सभी विघ्न-बाधाओं के निवारण की कामना
ग्रहों के स्वामी शिव की कृपा से ग्रह जनित बाधाओं और अकाल कष्टों से पूर्ण सुरक्षा
परिवार में सुख, शांति, आपसी प्रेम और भगवान भोलेनाथ के अभयदान की प्राप्ति
सोमवती अमावस्या के अमोघ मुहूर्त पर ज्योतिर्लिंग पूजन का पुण्य
शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का दिन पूर्णतः भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं कि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय दिन सोमवार को किया गया कोई भी अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं जाता है। सोमवार के दिन अगर अमावस्या भी हो तो, इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जो पुराणों में महाफलदायी तिथि मानी जाती है।
9 नवंबर को इस साल की आखिरी सोमवती अमावस्या के दिन जब भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का 21 द्रव्यों से विशेष रुद्राभिषेक कराया जाता है, तो जातक पर शिव की विशेष कृपा बरसने की मान्यता है। इस महामुहूर्त पर जब चतुर्थ ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में रुद्राभिषेक के साथ ही 11,000 पंचाक्षरी मंत्रों का जाप किया जाता है, तो भगवान भोलेनाथ तुरंत प्रसन्न होकर जातक के बड़े से बड़े कष्ट हर लेते हैं।
21 द्रव्य रुद्राभिषेक एवं 11,000 शिव पंचाक्षरी मंत्र जाप का अलौकिक प्रभाव
21 द्रव्य रुद्राभिषेक: 21 द्रव्य रुद्राभिषेक भगवान शिव की आराधना का एक भव्य और महा-कल्याणकारी अनुष्ठान है। सामान्य रुद्राभिषेक में जहां मुख्य रूप से 5 या 7 द्रव्यों का उपयोग होता है, वहीं इस विशेष महा-अभिषेक में 21 अलग-अलग पवित्र तरल पदार्थों और औषधियों की धाराओं से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक द्रव्य का विशेष शास्त्रीय महत्व है—गन्ने का रस धन वृद्धि देता है, दूध आरोग्य देता है, शहद पाप नाश करता है, गंगाजल/नर्मदा जल मोक्ष व शांति प्रदान करता है और भस्म रक्षा प्रदान करती है।
11,000 पंचाक्षरी मंत्र जाप: शिव पंचाक्षरी मंत्र ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी मंत्र की पूर्ण ऊर्जा को जाग्रत करने के लिए उसकी एक निश्चित संख्या निर्धारित होती है। पंचाक्षरी मंत्र के लिए यह संख्या 11,000 की तय की गई है। मान्यता है कि निर्धारित संख्या का जाप कराने से जीवन आ रहे गंभीर संकट शीघ्र दूर हो जाते हैं।
स्वयंभू स्वरुप में विराजमान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की अलौकिक महिमा
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग किसी के द्वारा बनाया नहीं गया है, बल्कि स्वयं प्रकट हुआ है। शिव महापुराण के अनुसार, एक बार विंध्याचल पर्वत ने नारद जी के मुख से मेरु पर्वत की प्रशंसा सुनी। स्वयं को मेरु पर्वत से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए विंध्याचल पर्वत ने नर्मदा नदी के तट पर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और भगवान शिव की कठोर तपस्या की। विंध्याचल पर्वत की अनन्य भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर साक्षात भगवान शिव प्रकट हुए और उसे मनचाहा कार्य सिद्ध करने का वरदान दिया।
इसी दौरान वहां देवता और ऋषि-मुनि भी आ गए, जिन्होंने सृष्टि के संतुलन और लोक-कल्याण के लिए महादेव से उसी स्थान पर ठहरने की प्रार्थना की। इस इच्छा को पूरी करने के लिए महादेव ज्योति स्वरूप में यहां स्थापित शिवलिंग में समा गए।
हर शाम यहां विश्राम बढ़ाता है महत्व
मान्यता है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करने के बाद माता पार्वती के साथ रात में यहीं विश्राम करते हैं। प्रतिदिन यहां भगवान की विशेष शयन आरती होती है और गर्भगृह में चौसर (पासे) बिछाई जाती है। कई बार सुबह कपाट खुलने पर पासे अपनी जगह से हिले हुए या बिखरे हुए मिलते हैं, जिसे साक्षात शिव-पार्वती की उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है। कहते हैं कि शिव-पार्वती यहां चौसर खेलते हैं।
पूजा के लाभ
उत्तम स्वास्थ्य एवं आरोग्य
21 द्रव्यों के अभिषेक से पुरानी बीमारियां, शारीरिक दुर्बलता और अकाल कष्ट दूर होने की मान्यता है।
समस्त बाधाओं का अंत
भगवान शिव की कृपा से व्यापारिक घाटा, मुकदमों की अड़चनें, नौकरी की समस्याएं और पारिवारिक विघ्न समाप्त होते हैं।
ग्रह-दोषों से मुक्ति
ग्रहोे के स्वामी महादेव के ज्योतिर्लिंग रुद्राभिषेक व पूजन से ग्रह जनित दोष शांत होते हैं।
मानसिक शांति व आत्मबल
11,000 पंचाक्षरी मंत्रों के जाप से एंग्जायटी, डर और तनाव समाप्त होकर असीम शांति मिलने की मान्यता है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति व नवग्रह आवाहन
सर्वविघ्नहर्ता श्री गणेश, माता पार्वती, नर्मदा मैया एवं ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर का विधिवत पूजन व कलश स्थापना की जाएगी।
नाम-गोत्र संकल्प
आपके नाम-गोत्र का मनोकामना सिद्धि हेतु आचार्यों द्वारा विशेष संकल्प।
21 द्रव्य महारुद्राभिषेक
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का 21 द्रव्यों से धारावाहिक रुद्राभिषेक।
11,000 शिव पंचाक्षरी मंत्र जाप
विद्वान आचार्यों द्वारा भगवान शिव के परम सिद्ध पंचाक्षरी मंत्र का 11,000 बार शुद्ध सस्वर जाप।
रुद्र शांति महायज्ञ व आरती
बेलपत्र, तिल, घृत और विशेष हवन सामग्रियों से महायज्ञ में आहुतियाँ देकर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर की भव्य आरती।
आपको क्या मिलेगा?
पूजा का पूरा स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


