घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
1,25,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप एवं दशांश हवन
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पूजा का महत्व
काशी के महामृत्युंजय मंदिर में इस अनुष्ठान का उद्देश्य
असाध्य बीमारियों से मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद
अकाल मृत्यु के भय और दुर्घटना से सुरक्षा की कामना
जीवन में आ रही बाधाओं से बचने के लिए शिव की आराधना
महादेव की अनुकंपा से दरिद्रता का नाश
परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा, उन्नति और सुख-समृद्धि की कामना
महामृत्युंजय मंत्र की महिमा
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अर्थ: हम त्रिनेत्रधारी (तीनों लोकों के स्वामी) भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो समस्त संसार में जीवन की सुगंध फैलाते हैं और हमारा पोषण करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बेल के बंधन से स्वयं मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार महादेव हमें मृत्यु और संसार के बंधनों से मुक्त करें, लेकिन अमरता से पृथक न करें।
पौराणिक कथा: क्यों अमोघ माना जाता है महामृत्युंजय?
शिव पुराण के अनुसार, ऋषि मृकंडु और उनकी पत्नी मरुद्मती को कोई संतान नहीं थी। कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें एक अल्पायु (केवल 16 वर्ष की आयु वाले) गुणवान पुत्र 'मार्कंडेय' का वरदान दिया। जब मार्कंडेय 16 वर्ष के हुए और यमराज स्वयं उनके प्राण हरने आए, तब बाल मार्कंडेय ने काशी में शिवलिंग को बाहों में भरकर महामृत्युंजय मंत्र का अखंड जाप शुरू कर दिया।
मार्कंडेय की इस अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात् भगवान शिव प्रकट हुए और यमराज को पीछे हटने पर विवश कर दिया। महादेव ने मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया और कहा कि जो भी मनुष्य काशी के इस पावन स्थल पर महामृत्युंजय मंत्र से पूजन और अभिषेक करेगा, यमराज भी उसका स्पर्श नहीं कर सकेंगे और वह अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा।
कार्तिक सोमवार के महामुहूर्त पर महामृत्युंजय जाप एवं दशांश हवन की महिमा
शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि सोमवार के दिन किया गया कोई भी शिव अनुष्ठान निष्फल नहीं जाता है। शिव के अनुष्ठान के लिए कार्तिक मास में पड़ने वाले सोमवार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। पुराणों के अनुसार, कार्तिक मास के सोमवार के दिन ही भगवान शिव ने चंद्रमा के श्राप को संशोधित किया और उन्हें अपनी जटाओं में स्थान दिया, जिसके बाद उन्हें 'सोमेश्वर' कहा गया। इसी कारण कार्तिक मास में सोमवार व्रत और शिव अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक सोमवार को मार्कंडेय ऋषि की तपोस्थली महामृत्युंजय मंदिर में जब 1,25,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप एवं दशांश हवन करने से जातक के जीवन से सभी कष्ट मिट जाते हैं।
1,25,000 जाप एवं दशांश हवन का अलौकिक प्रभाव
शास्त्रों में सवा लाख (1,25,000) महामृत्युंजय मंत्र जाप को मंत्र सिद्धि और महा-कल्याणकारी अनुष्ठान का सर्वोच्च मानदंड माना गया है। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा किए गए सवा लाख जाप से ब्रह्मांडीय शिव-ऊर्जा जाग्रत होती है। जाप के पश्चात 10% (12,500 मंत्रों) की संख्या में जड़ी-बूटियों, गूलर, तिल, घृत और औषधीय समिधाओं से किया जाने वाला दशांश हवन वायुमंडल और जातक के प्रभामंडल (Aura) को शुद्ध कर नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है।
काशी के महामृत्युंजय मंदिर का महत्व
शास्त्रों में सिद्ध तीर्थ क्षेत्रों में किए गए अनुष्ठान का फल अनंत गुना माना गया है। भगवान शिव की त्रिशूल पर बसी नगरी 'काशी' का महामृत्युंजय मंदिर वही परम सिद्ध स्थान है, जहां भगवान धन्वंतरि द्वारा निर्मित स्वयंभू कूप (अमृत कूप) मौजूद है। मान्यता है कि इस जाग्रत क्षेत्र में विद्वान आचार्यों द्वारा सवा लाख महामृत्युंजय जाप और पंचामृत महाभिषेक से उत्पन्न ध्वनि तरंगें जातक के जीवन से समस्त नकारात्मक शक्तियों, बीमारियों और विपत्तियों का जड़ से नाश कर देती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वही स्थान है, जहां मार्कण्डेय ऋषि ने काल को हराने के लिए तप किया था।
पूजा के लाभ
अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति एवं दीर्घायु का आशीर्वाद
इस अमोघ पूजा से दुर्घटनाओं, अचानक आने वाले संकटों और अकाल मृत्यु के योग को टालकर लंबी आयु का आशीर्वाद देती है।
समस्त बाधाओं का अंत
भगवान शिव की कृपा से व्यापारिक घाटा, मुकदमों की अड़चनें, नौकरी की समस्याएं और पारिवारिक विघ्न समाप्त होते हैं।
मानसिक शांति व सुरक्षा कवच
भय, डिप्रेशन और अज्ञात डर समाप्त होकर आत्मबल मजबूत होने की मान्यता है।
दरिद्रता से मुक्ति एवं सुख-समृद्धि
मान्यता है कि महादेव की कृपा से दरिद्रता समाप्त होती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति, कलश व नवग्रह पूजन
सर्वविघ्नहर्ता श्री गणेश, नवग्रह और काशी के क्षेत्रपाल बाबा कालभैरव का आवाहन व पूजन।
नाम-गोत्र संकल्प
आपके नाम-गोत्र से मनोकामना सिद्धि हेतु विशेष वैदिक संकल्प।
1,25,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप
काशी के सिद्ध प्रकांड वैदिक आचार्यों द्वारा शुद्ध सस्वर 1,25,000 महामृत्युंजय मंत्रों का जप।
दशांश महायज्ञ/हवन
महामृत्युंजय मंत्रों के साथ आहुति देकर विशेष हवन सामग्रियों और आयुर्वेदिक औषधियों से दशांश हवन।
पूर्णाहुति व महाआरती
भगवान महामृत्युंजय महादेव की भव्य आरती, क्षमा प्रार्थना एवं आशीर्वाद ग्रहण।
आपको क्या मिलेगा?
पूजा और हवन का पूरा स्पष्ट वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.


