घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
7 जन्म दोष निवारण 11 विष्णु सहस्रनाम एवं पाप-क्षय यज्ञ महाअनुष्ठान
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पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
7 पूर्वजन्मों के संचित पाप-कर्मों, शाप और प्रारब्ध दोषों के अंत का आशीर्वाद
अकारण आ रही निरंतर असफलताओं, भारी कर्ज, व्यापारिक घाटे और दरिद्रता के शमन की कामना
असाध्य बीमारियों, अकाल मृत्यु के भय और अज्ञात मानसिक तनाव के नाश की प्रार्थना
देवउठनी एकादशी पर जाग रहे भगवान विष्णु से राहु-केतु, शनि व पितृ दोषों की शांति का आशीष
देवउठनी एकादशी पर 'पाप-क्षय महायज्ञ' का अलौकिक महत्व
कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी (देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी) सनातन धर्म का सबसे बड़ा महामुहूर्त है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु 4 महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) के बाद जागते हैं।
शास्त्रों में वर्णन है कि जिस दिन साक्षात जगत्पति विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, उस दिन ब्रह्मांड में सात्विक और कल्याणकारी ऊर्जा अपने चरम पर होती है। मान्यता है कि इस पावन महामुहूर्त पर जब 7 जन्मों के दोष निवारण के लिए 'पाप-क्षय यज्ञ' किया जाता है, तो भगवान श्री हरि भक्त की पुकार तुरंत सुनते हैं और जन्म-जन्मांतर के कर्म दंड को क्षमा कर देते हैं।
क्या है 'पाप-क्षय' का आध्यात्मिक व तांत्रिक रहस्य?
सनातन धर्म और गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य केवल इस जन्म के कर्म ही नहीं भोगता, बल्कि उसके साथ 7 पूर्वजन्मों के संचित कर्म-संस्कार (Past Lives Karma) भी चलते हैं। जब पिछले जन्मों के कोई उग्र पाप या बुरे कर्म (जैसे किसी का दिल दुखाना, जीव हत्या, पितृ अनादर या उधारी न चुकाना) इस जन्म में आते हैं, तो व्यक्ति को बिना किसी गलती के भी भारी नुकसान, बीमारियां और असफलताएं झेलनी पड़ती हैं।
पाप-क्षय का सिद्धांत: 'पाप-क्षय' का अर्थ है संचित पापों को जलाकर भस्म करना। मान्यता है कि जब अग्नि देव के माध्यम से भगवान विष्णु के 1,000 गुप्त नामों की आहुतियां समर्पित की जाती हैं, तो वह 'पाप-क्षय अग्नि' जातक की सूक्ष्म देह में छिपे 7 जन्मों के पाप-संस्कारों को नष्ट कर देती है।
मुक्ति और कल्याण: कहते हैं देवउठनी एकादशी पर पापों का क्षय होते ही रुका हुआ भाग्य जाग्रत होता है, बीमारियां शांत होती हैं और जीवन में अचल लक्ष्मी का वास होता है।
विष्णु सहस्रनाम (भगवान विष्णु के 1,000 दिव्य नाम) की महिमा
विष्णु सहस्रनाम की उत्पत्ति महाभारत के अनुशासन पर्व से हुई है। जब बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह से युधिष्ठिर ने पूछा था- "संसार का सबसे श्रेष्ठ धर्म कौन सा है जिससे मनुष्य सब दुखों से मुक्त हो जाए?" तब पितामह भीष्म ने कहा था कि भगवान विष्णु के 1,000 नामों का कीर्तन और स्तुति ही संसार का सबसे बड़ा पाप-नाशक धर्म है।
"यशः प्राप्नोति विपुलं ज्ञातिप्राधान्यमेव च।
अचलां श्रियमाप्नोति श्रेयः प्राप्नोत्यनुत्तमम्॥"
अर्थ: जो मनुष्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ व श्रवण करता है, वह समाज में यश, कुल में आदर, अचल धन-लक्ष्मी और सर्वोत्तम कल्याण प्राप्त करता है।
तिरुनेलवेली तीर्थ क्षेत्र (तमिलनाडु) की महिमा
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित तिरुनेलवेली एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध वैष्णव तीर्थ स्थल है, जो पावन 'ताम्रपर्णी नदी' के तट पर बसा हुआ है।
ऋषि अगस्त्य की तपोभूमि: पुराणों के अनुसार यह क्षेत्र महर्षि अगस्त्य की तपोभूमि रहा है। यहां भगवान श्री हरि विष्णु साक्षात कल्याणकारी रूप में विराजमान हैं।
पाप नाश की पावन धारा: मान्यता है कि ताम्रपर्णी नदी की पावन धारा में स्नान और इसके तट पर स्थित सिद्ध विष्णु धाम में देवउठनी एकादशी पर किए गए जाप व यज्ञ का फल सामान्य स्थान की तुलना में 1,000 गुना अधिक मिलता है।
पूजा के लाभ
7 जन्मों के संचित पापों से मुक्ति
यह अनुष्ठान पूर्वजन्मों के अनजाने पापों, शाप और दुष्कर्मों के नकारात्मक प्रभावो को समाप्त करने की कामना से किया जाता है।
अकाल मृत्यु व गंभीर रोगों से रक्षा
मान्यता है कि इस पूजन से अकाल दुर्घटना के योग टलते हैं, असाध्य बीमारियों से राहत मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक अवसाद और अज्ञात भय दूर होता है।
कर्ज मुक्ति व अचल लक्ष्मी की प्राप्ति
कहते हैं देवउठनी एकादशी पर श्री हरि के जागने से दरिद्रता का नाश होता है, रुका हुआ धन वापस मिलता है और व्यापार/करियर में उन्नति होती है।
पितृ दोष व भारी ग्रह दोषों का शमन
पुराणों के मुताबिक भगवान विष्णु के आशीर्वाद से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, राहु-केतु और मारकेश जैसे घातक दोष शांत होते हैं।
पूजा प्रक्रिया
विशेष नाम-गोत्र व पाप-क्षय संकल्प
देवउठनी एकादशी पर आचार्यों द्वारा यजमान और उनके परिवार के नाम, गोत्र के साथ 7 जन्मों के पाप शमन का वेदोक्त संकल्प।
श्री विष्णु-लक्ष्मी आह्वान व षोडशोपचार पूजन
तांबे के कलश पर जागृत श्री हरि विष्णु व मां लक्ष्मी का ध्यान, स्नान व केसर-चन्दन से पूजन।
11 विष्णु सहस्रनाम पाठ
प्रकांड वैदिक पुरोहितों द्वारा भगवान विष्णु के 1,000 दिव्य नामों का पाठ
अमोघ 'पाप-क्षय' महायज्ञ
पाठ उपरांत शुद्ध घृत, तिल, जौ, गूगल, शमी, आम की समिधा व औषधियों से हवन कुंड में 7 जन्मों के दोष शमन की आहुतियां
पूर्णाहुति व महाआरती
यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भगवान विष्णु की कपूर महाआरती कर परिवार की सर्व-सुरक्षा की प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) को तिरुनेलवेली के सिद्ध धाम से संपन्न हुए अनुष्ठान का पूरा HD वीडियो 48 घंटे के भीतर सीधे आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
मंदिर विवरण
पवित्र मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

