घर बैठे पूजा बुक कराई और पूजा का वीडियो WhatsApp पर आ गया। दूर रहते हुए भी ऐसा लगा जैसे मंदिर में ही हों।
कमलेश्वर महादेव वैकुंठ चतुर्दशी संतान सुख प्राप्ति अखंड दीप महापूजा एवं 1008 कमल अर्चना
You won't be charged yet
पूजा का महत्व
इस अनुष्ठान का उद्देश्य
निसंतान दंपतियों की मनोकामना पूर्ण कर सुयोग्य व उत्तम संतान सुख की प्राप्ति का आशीर्वाद
जन्मांतर के पापों,चित्त की शुद्धि और वंश दोषों के समूल नाश की कामना के लिए
जीवन के हर क्षेत्र में विजय पाने के लिए श्री हरि विष्णु और महादेव की संयुक्त अनुकंपा
साक्षात महालक्ष्मी और महादेव का स्थायी अनुग्रह व समृद्धि की मंगलकामना
वैकुंठ चतुर्थी महामुहूर्त में कमलेश्वर महादेव की महापूजा एवं दीपदान की महत्व
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'वैकुंठ चतुर्दशी' कहा जाता है। संपूर्ण वर्ष में यह एकमात्र ऐसा दुर्लभ दिन है जब साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु और देवाधिदेव शिव का महामिलन होता है। मान्यता है कि इस दिन वैकुंठ के द्वारा खुले होते हैं, इसीलिए इस मुहूर्त में अनुष्ठान करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात जीव सीधे श्री हरि के परमधाम 'वैकुंठ' को जाता है। कहते हैं कि जहां शिव की साधना में लीन भगवान हरि ने अपनी आंख शिव को अर्पित कर दी थी, उस पावन कमलेश्वर महादेव के पावन धाम में दीप दान और 1008 कमल पुष्पों अर्चना से निसंतान दंपतियों को संतान प्राप्ति, समस्त पापों को भस्म कर विजय का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण को यहीं साम्ब नाम के पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मिला था।
वैकुंठ चतुर्थी तिथि क्यों विशेष है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड और सृष्टि के संचालन की पूरी जिम्मेदारी देवाधिदेव महादेव संभालते हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी को जब श्री हरि विष्णु अपनी चार महीने की निद्रा से जागते हैं। इसके ठीक तीन दिन बाद चतुर्दशी तिथि को वे भगवान शिव से मिलने शिव लोक आते हैं। इस दिन महादेव, भगवान विष्णु को पुनः सृष्टि के संचालन का कार्यभार सौंपते हैं। इसी कारण इसे 'संसार की सत्ता का हस्तांतरण' और 'हरि-हर मिलन' का दिन कहा जाता है।
कमलेश्वर महादेव मंदिर की महिमा
पुराणों के अनुसार, जब दैत्यों का अत्याचार बढ़ गया, तो सभी देवता भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुंचे। दानवों का संहार करने के लिए एक दिव्य और अजेय अस्त्र की आवश्यकता थी, जिसके लिए श्री हरि विष्णु ने महादेव की आराधना करने का निश्चय किया। भगवान विष्णु ने भगवान शिव के हजार नामों (शिव सहस्रनाम) का पाठ करते हुए प्रत्येक नाम के साथ एक-एक कमल का पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया। भगवान विष्णु पूरी निष्ठा के साथ शिव जी के एक-एक नाम का उच्चारण करते और एक-एक कमल का फूल शिवलिंग पर अर्पित करते जा रहे थे। श्री हरि की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने माया से उन फूलों में से एक कमल का पुष्प अदृश्य (कम) कर दिया। जब पूजा के अंत में एक पुष्प कम पड़ा, तो अपना संकल्प पूरा करने के लिए 'कमलनयन' कहे जाने वाले भगवान विष्णु ने बिना किसी संकोच के अपनी एक आँख निकालकर शिवजी को अर्पित कर दी। विष्णु जी की इस अनन्य और परम भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए, उन्होंने विष्णु जी की आंख को पुनः ठीक कर दिया और उन्हें उपहार स्वरूप सुदर्शन चक्र भेंट किया। चूंकि विष्णु जी ने अपना कमल रूपी नयन भगवान शिव को अर्पित किया था, इसलिए महादेव का एक नाम 'कमलेश्वर' (कमल के ईश्वर) पड़ा गया। मान्यता है कि एक निसंतान दंपति भी मौजूद था जो इस पूरी पूजा को बड़ ध्यान से देख रहा था। भगवान विष्णु की अनन्य भक्ति और शिव के साक्षात प्रकट होने के दिव्य दृश्य को देखकर उस निसंतान दंपति ने भी इसी स्थान पर पूरी श्रद्धा से महादेव की तपस्या की। दंपति की साधना से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान दिया।
पूजा के लाभ
संतान प्राप्ति का आशीर्वाद
कमलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
समस्त पापों का नाश
महादेव और नारायण की कृपा से जाने- अनजाने हुए पाप जलकर भस्म हो जाते हैं।
विजय प्राप्ति का आशीर्वाद
जीवन में चल रहे मुकदमों, भूमि-विवादों, गुप्त शत्रुओं और प्रतियोगिताओं में पूर्ण सफलता व विजय का आशीर्वाद मिलता है।
हरि-हर का संयुक्त आशीर्वाद
शिव और विष्णु की एक साथ कृपा मिलने से परिवार में कभी धन-धान्य एवं समृद्धि मिलने की मान्यता है।
पूजा प्रक्रिया
गणपति, हरि-हर व कलश पूजन
सर्वविघ्नहर्ता श्री गणेश, भगवान विष्णु, माँ पार्वती एवं कमलेश्वर महादेव का आवाहन व कलश स्थापना।
नाम-गोत्र संकल्प
आपके नाम-गोत्र से संतान सुख, पाप-क्षय व विजय-प्राप्ति की कामना हेतु आचार्यों द्वारा विशेष संकल्प।
1008 कमल अर्चना
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 1008 पवित्र कमल पुष्पों को एक-एक कर शिवलिंग पर अर्पित करते हुए महापूजा।
अखंड दीप संकल्प व शिव महिम्न पाठ
वैकुंठ चतुर्दशी की सिद्ध रात्रि में आपके नाम से अखंड दीपक प्रज्वलित कर शिव महिम्न स्तोत्र का शुद्ध पाठ।
महायज्ञ एवं आरती
विशेष आहुतियों के साथ यज्ञ, कमलेश्वर महादेव की भव्य महाआरती एवं क्षमा प्रार्थना।
आपको क्या मिलेगा?
पूजा का स्पष्ट एवं पूरा वीडियो 48 घंटे के भीतर आपके WhatsApp पर भेज दिया जाएगा।
मंदिर विवरण
कमलेश्वर महादेव मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब
Puja Gallery
विदेश में रहकर भी काशी में हमारे नाम से पूजा हो गई। इतन अच्छे से तो घर में भी सबकुछ नहीं हो पाता।
What a platform? I never thought that, Veda Mandir people perform Puja so Nicely.

